देश की खबरें | सत्तावन फीसद लोग निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज पर भारी खर्च से परेशान

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोगों के बीच कराये गये एक सर्वेक्षण के दौरान करीब 57 फीसदी प्रतिभागियों ने निजी अस्पतालों में कोविड-19 के इलाज पर भारी खर्च को लेकर चिंता प्रकट की जबकि 46 फीसदी लोगों ने सरकारी अस्तपालों में द्वितीयक संक्रमण होने का डर सामने रखा।

जियो

नयी दिल्ली, 30 मई लोगों के बीच कराये गये एक सर्वेक्षण के दौरान करीब 57 फीसदी प्रतिभागियों ने निजी अस्पतालों में कोविड-19 के इलाज पर भारी खर्च को लेकर चिंता प्रकट की जबकि 46 फीसदी लोगों ने सरकारी अस्तपालों में द्वितीयक संक्रमण होने का डर सामने रखा।

सामुदायिक सोशल मीडिया मंच लोकलसर्किल्स द्वारा कराये गये सर्वेक्षण के दौरान कोविड-19 के उपचार पर सरकारी एवं निजी अस्पतालों के बारे में जनधारणा को लेकर 40,000 लोगों से पांच प्रश्न किये गये थे।

यह भी पढ़े | lockdown 5.0: 30 जून तक बढ़ा देशभर में लॉकडाउन, रेस्टोरेंट, धार्मिक स्थल, सैलून खोलने की मिली इजाजत: 30 मई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

सर्वेक्षण के दौरान करीब 61 फीसद लोगों ने इच्छा जाहिर की कि सरकार निजी अस्पतालों मे कोरोना वायरस उपचार के संबंध में कमरे की दर की सीमा तय करे या मानक शुल्क निर्धारित करे।

सर्वेक्षण के अनुसार 46 फीसदी लोगों ने अस्पतालों में भीड़ तथा संक्रमण रोकथाम नियंत्रण मापदंड के पालन में हीलाहवाली के चलते द्वतीयक संक्रमण होने की चिंता प्रकट की जबकि 32 फीसदी ने उपयुक्त मेडिकल बुनियादी ढांचे के अभाव को देश में उपलब्ध कोविड-19 उपचार में अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया। करीब 16 फीसदी लोगों ने देर तक इंतजार कराने और अकार्यकुशलता को बड़ा मुद्दा बताया।

यह भी पढ़े | Unlock 1: गृह मंत्रालय ने Lockdown 5.0 को लेकर जारी की गाइडलाइंस, कंटेनमेंट जोन में 30 जून तक रहेगा लॉकडॉउन.

जब लोगों से पूछा गया कि यदि उन्हें कोरोना वायरस बीमारी हो जाती है तो वे इलाज के लिए कहां जाना चाहेंगे, तो 32 फीसद ने कहा कि वे निजी अस्पताल जाना पसंद करेंगे।

इस सवाल के जवाब में 22 फीसदी लोगों ने कहा कि वे सरकारी अस्पताल जाना चाहेंगे जबकि 32 फीसदी ने कहा कि वे अस्पताल जाना ही नहीं चाहते जबकि 14 फीसदी अनिश्चय की स्थिति में नजर आये।

सर्वेक्षण के दौरान संक्रमितों की अधिक संख्या वाले रेड जोन में कई लोगों ने कोविड-19 के उपचार को लेकर निजी अस्पतालों की सीमित क्षमता तथा सरकारी अस्पतालों में दाखिले के लिए लंबे समय तक इंतजार कराने को लेकर चिंता प्रकट की।

लोकल सर्किल्स के महाप्रबंधक अक्षय गुप्ता ने कहा,‘‘ यह बताता है कि क्यों 32 फीसदी लोग कहते हैं कि वे घर में ही रहना पसंद करेंगे और उपचार करायेंगे तथा तबतक अस्पताल नहीं जायेंगे जबतक कोई आपातस्थिति नहीं हो।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

\