पड़ोसी देशों के निवेशकों के लिए एफडीआई नियमों में सख्ती सही समय पर उठाया गया कदम: विशेषज्ञ

सरकार ने शनिवार को भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों के लिए विदेशी निवेश के लिये सरकारी अनुमति लेने को अनिवार्य कर दिया था। यह कदम कोविड-19 के चलते भारतीय कंपनियों के किसी ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ को रोकने के लिए उठाया गया।

जमात

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल सरकार द्वारा चीन जैसे पड़ोसी देशों के निवेशकों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियम कड़ा करने का फैसला सही समय पर उठाया गया कदम है। विशेषज्ञों का कहना है कि विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों की दृष्टि से यह काफी अच्छा कदम है। हालांकि, उन्होंने संवेदेनशील क्षेत्रों में आने वाले दूसरे देशों के निवेश प्रस्तावों पर भी गौर किये जाने पर जोर दिया।

सरकार ने शनिवार को भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों के लिए विदेशी निवेश के लिये सरकारी अनुमति लेने को अनिवार्य कर दिया था। यह कदम कोविड-19 के चलते भारतीय कंपनियों के किसी ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ को रोकने के लिए उठाया गया।

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन शार्दुल श्राफ ने कहा कि इस फैसले से भारत ऐसे एफडीआई की निगरानी कर सकेगा, जिसका मकसद महामारी के दौरान कम मूल्यांकन पर भारतीय इकाइयों का अधिग्रहण करना है।

श्राफ ने कहा कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले सात देशों की इकाइयां सिर्फ सरकार से मंजूरी लेकर ही निवेश कर पाएंगी।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर ने इसे समय पर उठाया गया कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बात की आशंका थी कि चूंकि लॉकडाउन की वजह से घरेलू कंपनियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, ऐसे में चीन की कंपनियां उनके अधिग्रहण का प्रयास कर सकती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘संकट के इस समय न केवल चीन बल्कि अन्य देशों की कंपनियों द्वारा भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण की आशंका है। ऐसे में सरकार को सिर्फ एक देश नहीं बल्कि सभी देशों के अधिग्रहण प्रस्तावों को देखना चाहिए।’’

डेलायट इंडिया के भागीदार रजत वाही ने कहा कि सरकार देशों के बजाय क्षेत्रों की पहचान करके फैसला करती तो यह बेहतर फैसला होता। भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यामां और अफगानिस्तान आते हैं।

नांगिया एंडरसन एलएलपी के निदेशक संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि भारत-चीन आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिषद के अनुमान के अनुसार चीन के प्रौद्योगिकी निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप्स में चार अरब डॉलर का नया निवेश किया है। उन्होंने कहा कि उनके निवेश की रफ्तार इतनी तेज है कि देश के 30 यूनिकॉर्न में से 18 चीन से वित्तपोषित हैं। यूनिकॉर्न से तात्पर्य ऐसे स्टार्टअप्स से है जिनका मूल्यांकन एक अरब डॉलर से अधिक है।

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