देश की खबरें | कांगो में मारे गये बीएसएफ जवानों के परिजनों ने सरकार पर असंवेदनशील रहने का आरोप लगाया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अफ्रीकी देश कांगो में मारे गए सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ) के राजस्थान निवासी दो जवानों के परिवार के सदस्यों ने हमले के बारे में उनसे कोई सूचना कथित तौर पर साझा नहीं किये जाने और उन्हें इस बारे में अंधेरे में रखने को लेकर सोमवार को सरकार की आलोचना की।
सीकर/बाड़मेर(राजस्थान), एक अगस्त अफ्रीकी देश कांगो में मारे गए सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ) के राजस्थान निवासी दो जवानों के परिवार के सदस्यों ने हमले के बारे में उनसे कोई सूचना कथित तौर पर साझा नहीं किये जाने और उन्हें इस बारे में अंधेरे में रखने को लेकर सोमवार को सरकार की आलोचना की।
बीएसएफ के हेड कांस्टेबल शिशुपाल सिंह बागडिया की पत्नी कमला देवी और बेटी ने कहा कि वे करीब एक हफ्ते से जयपुर हाउस में थे और शव का इंतजार कर रहे थे लेकिन उनका सांत्वना देने या उपयुक्त सूचना देने के लिए कोई नहीं आया।
बागडिया और बीएसएफ जवान सांवलाराम विश्नोई कांगो में सुंयुक्त राष्ट्र शांति सेना मिशन का हिस्सा थे। वे 26 जुलाई को वहां बुटेम्बो शहर में सशस्त्र प्रदर्शनकारियों के हमले में मारे गये थे।
दोनों जवानों का सोमवार को अपने-अपने पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
बागडिया का अंतिम संस्कार लक्ष्मणगढ़,सीकर में उनके पैतृक गांव बागडिया की ढाणी में किया गया। उनके सम्मान में एक तिरंगा यात्रा निकाली गई जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।
बीएसएफ के अधिकारियों के अलावा, सीकर से भाजपा सांसद स्वामी सुमेधानंद, कांग्रेस की प्रदेश इकाई के प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई नेता, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों ग्रामीणों ने बागडिया को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कमला देवी और उनकी बेटी ने डोटासरा की उपस्थिति में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘मेरे पति ने सर्वोच्च बलिदान दिया है और मुझे इस पर गर्व है लेकिन मुझे सरकार से निराशा हुई। हमारे पास कोई नहीं पहुंचा। हम ही जानते हैं कि हमने पिछले 6-7 दिन कैसे बिताए, कितना मुश्किल था, हम रो रहे थे लेकिन दुर्भाग्य से हमसे यह पूछने वाला कोई नहीं था कि आखिर क्या हुआ है।’’
उन्होंने डोटासरा से कहा ‘‘ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते मुझे आपसे उम्मीद थी कि कम से कम आप पूछेंगे क्योंकि यह आपका क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र) है।’’ इस पर, डोटासरा ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और वह परिवार के साथ खड़े हैं।
बागडिया की बेटी ने कहा कि वे पार्थिव शरीर के लिए इंतजार कर रहे थे और अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन कोई उपयुक्त सूचना नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानना चाहती हूं कि मेरे पिता के साथ असल में क्या हुआ था। उन्होंने परिवार से अधिक राष्ट्र की सेवा की। हम जानना चाहते हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई थी। इसकी जांच होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हर किसी ने सिर्फ ट्वीट किया और कोई हमारे पास नहीं आया। ’’
बाड़मेर में, विश्नोई की सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई।
उनके पार्थिव शरीर को बाड़मेर में बीएसएफ बटालियन मुख्यालय में श्रद्धांजलि के लिये रखा गया था और उसके बाद उसे वहां से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित गुड़ा मालानी में उनके पैतृक गांव बांड तक एक सजे हुए ट्रक में ले जाया गया।
मार्ग के दोनों और हजारों की संख्या में जमा लोगों ने ‘‘भारत माता की जय’’ और ‘‘सांवलाराम अमर रहे’’ के नारे लगाये।
वन मंत्री और विधायक हेमाराम चौधरी, श्रम मंत्री सुखराम विश्नोई समेत अन्य जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने बीएसएफ जवान को पुष्पांजलि अर्पित की।
सांवलाराम की पत्नी ने कहा कि उन्हें अपने पति के सर्वोच्च बलिदान पर गर्व है और वह अपने दोनों बेटों को देश की सेवा के लिये सशस्त्र बलों में भेजेंगी।
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