जरुरी जानकारी | मृदा स्वास्थ्य, कटाई बाद का प्रबंध पर ध्यान देने पर बल, इनके लिए एक लाख करोड़ रुपये का कोष : तोमर
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए मृदा स्वास्थ्य और कटाई बाद के प्रबंधन को प्रमुख चिंता का क्षेत्र बताते हुए, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि सरकार ने आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत भंडारण अवसंरचना को मजबूत करने तथा फसल कटाई के बाद के नुकसान को कमतर करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का कोष बनाया है।
नयी दिल्ली, 27 जनवरी भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए मृदा स्वास्थ्य और कटाई बाद के प्रबंधन को प्रमुख चिंता का क्षेत्र बताते हुए, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि सरकार ने आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत भंडारण अवसंरचना को मजबूत करने तथा फसल कटाई के बाद के नुकसान को कमतर करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का कोष बनाया है।
विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के सप्ताह भर चलने वाले ऑनलाइन दावोस एजेंडा सम्मेलन के दौरान ‘‘खाद्य प्रणाली के रूपांतरण’’ विषय पर एक पैनल चर्चा में मंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके तहत सरकार प्रति व्यक्ति प्रति माह 2-3 रुपये के उच्च रियायती मूल्य पर पांच किलोग्राम गेहूं और चावल प्रदान करती है।
वह एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि भारत सरकार नवाचारों को उत्प्रेरित करने और खाद्य प्रणालियों को बदलने के लिए नए समाधानों की दिशा में क्या कदम उठा रही है।
तोमर ने कहा कि पोषण देश के लिए एक बड़ा विचार का वाला और प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और सरकार ने राष्ट्रीय पोषण मिशन भी शुरू किया है।
दूसरी ओर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा नई किस्मों के उत्पादन के लिए व्यापक शोध हो रहा है जो सभी तक पहुंच सकता है।
तोमर ने कहा, ‘‘मुख्य रूप से चिंता मृदा स्वास्थ्य की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 में एक कार्यक्रम शुरू किया जिसके तहत 12 करोड़ किसानों को स्वास्थ्य कार्ड दिए गए हैं। हम अब उर्वरकों को अधिक कुशल तरीके से उपयोग करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए इन कार्डों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि मजबूत अनुसंधान और विकास नेटवर्क द्वारा उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जा रहा है और हम पहले से ही कृषि उत्पादन में वृद्धि की प्रवृत्ति देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईसीएआर प्रतिकूल जलवायु सहने वाले और पौष्टिक किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
तोमर ने आगे कहा, ‘‘फसल कटाई बाद के प्रबंधन भी हमारे लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है और इससे निपटने के लिए, प्रधान मंत्री मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का नारा दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत, हमने कृषि-बुनियादी ढांचे और शीत भंडारगृहों की श्रृंखला को मजबूत करने के लिए 13 अरब डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये) के कोष की स्थापना की है ताकि फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम किया जाये।’’
उसी पैनल चर्चा में बोलते हुए, प्रमुख वैश्विक उर्वरक कंपनी यारा इंटरनेशनल के सीईओ स्वेन टोरे होल्सेतर ने कहा कि जैसा कि मंत्री तोमर ने कहा, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि सब कुछ मृदा स्वास्थ्य पर निर्भर करता है और प्रौद्योगिकी मृदा स्वास्थ्य में सुधार ला सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘स्वस्थ मिट्टी न केवल बेहतर गुणवत्ता वाली ऊपज और खेती को आगे बढ़ा सकता है बल्कि यह कार्बन फुटप्रिंट (उत्सर्जन) को भी कम करती है।’’
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