देश की खबरें | एल्गार परिषद मामला: ज़मानत आदेश के क्रियान्वयन पर लगी रोक को पांच अक्टूबर तक बढ़ायी गयी

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नयी दिल्ली, 27 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार कार्यकर्ता महेश राउत को मिली ज़मानत के क्रियान्वयन पर बंबई उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को पांच अक्टूबर तक के लिए बुधवार को बढ़ा दिया।

बंबई उच्च न्यायालय ने 21 सितंबर को 33 वर्षीय राउत को ज़मानत दी थी और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के वकील के आग्रह पर अपने आदेश के क्रियान्वयन पर एक हफ्ते की रोक लगा दी थी ताकि एजेंसी उच्चतम न्यायालय में इसे चुनौती दे सके।

राउत को जून 2018 में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

उच्चतम न्यायालय में एनआईए की अपील पर न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यामूर्ति बेला एम त्रिवेदी ने बुधवार को सुनवाई की। पीठ ने कहा, “ हम अपील पर सुनवाई करेंगे।”

एनआईए की ओर से पेश वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय ने राउत को जमानत देने के अपने आदेश के क्रियान्वयन पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा, "आज तक रोक लगी हुई है। रोक बढ़ाई जा सकती है।"

इसके बाद पीठ ने रोक को पांच अक्टूबर को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया।

पीठ ने कहा, "बंबई उच्च न्यायालय फैसले के क्रियान्वयन पर पहले से लगी रोक सुनवाई की अगली तारीख तक जारी रहेगी।"

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, “मौजूदा मामले में, संदिग्ध दस्तावेजों से किसी भी तरह से प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि अपीलकर्ता (राउत) ने यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम) की धारा 15 के तहत अपराध माने जाने वाले किसी 'आतंकी कृत्य' को अंजाम दिया है, या उसमें शामिल रहे हैं।”

अदालत ने कहा, “हमारे अनुसार, ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिसके आधार पर यह माना जाए कि अपीलकर्ता के खिलाफ यूएपीए की धारा 16, 17, 18, 20 और 39 के तहत आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं।”

यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद से संबंधित है। पुणे पुलिस के अनुसार माओवादियों ने इस सम्मेलन का आयोजन किया था।

पुलिस ने आरोप लगाया था कि सम्मेलन में दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन पुणे में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक पर हिंसा हुई।

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