मिस्र के राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस प्रकोप के मद्देनजर अधिकारों का विस्तार किया

नये संशोधन राष्ट्रपति को वायरस से निपटने के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद करने तथा विदेशों से लौटने वालों को पृथक-वास में भेजने जैसे कदम उठाने के अधिकार देते हैं।

एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने संशोधनों की निंदा करते हुए कहा है कि सरकार ने वैश्विक महामारी का इस्तेमाल ‘सुधारों के विस्तार के लिए नहीं, बल्कि मिस्र के अनुचित आपातकालीन कानून का विस्तार करने के लिए’ किया है।

नये संशोधन राष्ट्रपति को वायरस से निपटने के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद करने तथा विदेशों से लौटने वालों को पृथक-वास में भेजने जैसे कदम उठाने के अधिकार देते हैं।

साथ ही इन संशोधनों से सार्वजनिक एवं निजी सभाओं, प्रदर्शनों, समारोहों और अन्य तरह के समागमों को प्रतिबंधित करने के विस्तृत अधिकार भी मिलते हैं।

इन संशोधनों पर सिसी ने शुक्रवार को हस्ताक्षर किये है। इस संशोधित कानून में राष्ट्रपति को करों और अन्य भुगतानों को स्थगित करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी अनुमति देगा।

संसद ने पिछले महीने इस कदम को मंजूरी दी थी।

मिस्र में अप्रैल 2017 से आपातकाल लागू है और सरकार ने पिछले महीने इसे तीन और महीनों के लिए बढ़ाया था।

गौरतलब है कि मिस्र में कोरोना वायरस से 504 लोगों की मौत हो चुकी है और संक्रमण के लगभग 8,500 मामले सामने आये है।

एपी

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