देश की खबरें | ईडी ने अंग निकालने, वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित "अंग निकालने और वित्तीय धोखाधड़ी" के मामले में एक झोलाछाप डॉक्टर और उसके सहायक के खिलाफ पटना की एक विशेष अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
नयी दिल्ली, 23 जुलाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित "अंग निकालने और वित्तीय धोखाधड़ी" के मामले में एक झोलाछाप डॉक्टर और उसके सहायक के खिलाफ पटना की एक विशेष अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
ईडी के एक बयान में कहा गया है कि आर्थिक खुफिया एजेंसी ने बिहार के मुजफ्फरपुर के एक पुलिस स्टेशन द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और मानव अंग प्रतिरोपण अधिनियम, 1994 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों के लिए दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की।
एजेंसी ने कहा कि ईडी पटना जोनल कार्यालय ने अंग निकालने और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में पवन कुमार और रवींद्र कुमार उर्फ आर के सिंह के खिलाफ पटना में विशेष अदालत (पीएमएलए) के समक्ष पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 17 जून को अभियोजन शिकायत दर्ज की।
विशेष अदालत ने 17 जुलाई को अभियोजन पक्ष की शिकायत का संज्ञान लिया।
ईडी की जांच से पता चला कि सुनीता देवी अपनी मां तेतरी देवी के साथ अपने गर्भाशय के इलाज के लिए मुजफ्फरपुर के शुभकांत क्लीनिक गई थीं।
बयान में कहा गया है कि शुभकांत क्लीनिक के संचालक पवन कुमार ने झोलाछाप डॉक्टर रविंद्र कुमार उर्फ आर के सिंह के साथ मिलकर महिला को कथित रूप से क्षतिग्रस्त गर्भाशय के लिए सर्जरी की सलाह दी और "20,000 रुपये की मांग की।"
ऑपरेशन के दौरान, सुनीता देवी की दोनों किडनी के साथ-साथ गर्भाशय भी कथित रूप से निकाल दिया गया, जबकि दावा यह था कि केवल गर्भाशय और ट्यूमर ही निकाला गया था।
सर्जरी के बाद, सुनीता देवी की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें पेशाब आना बंद हो गया और उनकी मृत्यु हो गई। मेडिकल जांच में दोनों किडनी निकाले जाने की पुष्टि हुई।
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