जरुरी जानकारी | पूर्वी भारत के किसान गेहूं की जल्दी बुवाई कर बढ़ा सकते हैं अपनी उपज : अध्ययन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भूमंडल के गर्म होने के कारण पूर्वी भारत के किसान गेहूं की जल्दी बुवाई कर उपज बढ़ा सकते हैं, जिससे उन्हें खाद्य सुरक्षा और कृषि लाभप्रदता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
नयी दिल्ली, तीन अगस्त भूमंडल के गर्म होने के कारण पूर्वी भारत के किसान गेहूं की जल्दी बुवाई कर उपज बढ़ा सकते हैं, जिससे उन्हें खाद्य सुरक्षा और कृषि लाभप्रदता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि गेहूं की बुवाई की तारीखों को समायोजित करने से पूर्वी भारत की अप्रयुक्त उत्पादन क्षमता में 69 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
टीम ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से गहन आंकड़ों को संकलित किया, जिससे उन्हें बड़े आंकड़ा विश्लेषण के माध्यम से जटिल कृषि वास्तविकताओं को जानने का मौका मिला और यह तय करने का मौका मिला कि कृषि प्रबंधन प्रथाएं वास्तव में छोटे भू-धारकों के मामलों में क्या अहमियत रखती हैं।
कॉर्नेल विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रयू मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया ने पुष्टि की है कि रोपाई की तिथियां भारत के पूर्वी क्षेत्र में प्रमुख चावल-गेहूं फसल प्रणालियों में प्रतिकूल जलवायु सहने की क्षमता और उत्पादकता परिणामों की नींव हैं।’’
हाल ही में जर्नल ‘नेचर फूड’ में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि पूर्वी भारत में किसान पहले गेहूं बोकर उपज बढ़ा सकते हैं - फसल के परिपक्व होने पर गर्मी के तनाव से बच सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हस्तक्षेप से चावल की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विचार है।
अध्ययन में चावल की बुवाई की तारीखों और किस्मों के लिए नई सिफारिशें भी की गई हैं, ताकि गेहूं की पहले की बुवाई को समायोजित किया जा सके।
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