देश की खबरें | संज्ञेय अपराध की जानकारी पर प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य : बंबई उच्च न्यायालय

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मुंबई, 21 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि यदि किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी पुलिस के संज्ञान में लाई जाती है तो प्राथमिकी दर्ज करना उसका कर्तव्य है।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यामूर्ति शर्मिला देशमुख की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की जिसमें पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त की ओर से जारी परिपत्र (सर्कुलर) को चुनौती दी गई है। इस सर्कुलर में कहा गया था कि महिला की मर्यादा भंग करने के मामले और बच्चों का यौन अपराध से संरक्षण करने वाले कानून (पोक्सो) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पुलिस उपायुक्त की अनुमति ली जाए।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अरुण कदम ने पीठ को अवगत कराया कि सर्कुलर को नये पुलिस आयुक्त ने 12 जुलाई को वापस ले लिया था।

कदम ने कहा कि इस सर्कुलर को चुनौती देने का मकसद यह है कि एक पुलिस थाने ने उनकी मुवक्किल और उनकी बेटी के खिलाफ हुए यौन हिंसा के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया था।

इस इनकार के बाद पीड़ित ने प्रथमिकी दर्ज कराने के लिए मुंबई स्थित विशेष पोक्सो अदालत में गुहार लगाई।

न्यायमूर्ति रेवती मोहित ने कहा, ‘‘गलत या सही, एक बार पुलिस के संज्ञान में संज्ञेय अपराध होने की जानकारी ला दी जाती है, तो प्राथमिकी दर्ज करना उसका कर्तव्य हो जाता है। यदि कोई साक्ष्य नहीं हैं, तो उचित रिपोर्ट को भरा जा सकता है।’’

हालांकि, अदालत ने सर्कुलर वापस लिए जाने के मद्देनजर याचिका का निपटारा कर दिया। यह सर्कुलर पहली बार पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडेय ने गत छह जून को जारी किया था, जिसे 17 जून को संशोधित किया गया।

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