जरुरी जानकारी | सस्ते आयात के कारण दबाव में हैं घरेलू कागज उद्योग: आईपीएमए
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कोरोना वायरस महामारी से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने तथा चीन, दक्षिण कोरिया समेत आसियान देशों से सस्ते आयात के कारण घरेलू पेपर मिल्स दवाब में हैं। एक उद्योग संगठन ने इसका हवाला देकर सरकार से कागज पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की मांग की है।
नयी दिल्ली, 19 जून कोरोना वायरस महामारी से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने तथा चीन, दक्षिण कोरिया समेत आसियान देशों से सस्ते आयात के कारण घरेलू पेपर मिल्स दवाब में हैं। एक उद्योग संगठन ने इसका हवाला देकर सरकार से कागज पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की मांग की है।
घरेलू पेपर मिल्स के संगठन इंडियन पेपर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) ने एक विज्ञप्ति में बताया है कि उसने इस बाबत सरकार को एक पत्र लिखा है।
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संगठन ने कहा कि कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से कागज उद्योग की पूरी आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गयी है। लॉकडाउन से राहत के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। ऐसे में घरेलू उद्योगों की खराब हालत का फायदा उठाते हुए हाल के दिनों में कागज का आयात तेजी से बढ़ा है।
संगठन ने कहा कि आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होने पर भी वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान कागज आयात में कोई कमी नहीं आयी। वित्त वर्ष 2018-19 में आसियान से 1,830 करोड़ रुपये का कागज आयात हुआ था, जो वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 11 महीने में ही 1,870 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह से वित्त वर्ष 2019-20 में अप्रैल से फरवरी के बीच 1,773 करोड़ रुपये का कागज आयात हुआ, जो 2018-19 में पूरे वित्त वर्ष के दौरान 1,831 करोड़ रुपये रहा था।
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संगठन के अध्यक्ष ए. एस. मेहता ने कहा, ‘‘ज्यादा घरेलू उत्पादन क्षमता वाले चीन और इंडोनेशिया जैसे देश इस मौके का फायदा उठा रहे हैं और अपना अतिरिक्त कागज बहुत कम कीमत में भारत में बेच रहे हैं। भारत-आसियान एफटीए या एपीटीए के चलते इन पर शून्य या बहुत कम आयात शुल्क लगता है। इससे भारत में पहले से ही दबाव में चल रही कई पेपर मिल के लिए अपना संचालन मुश्किल हो गया है। इससे न सिर्फ सरकार को राजस्व का नुकसान होगा बल्कि हजारों लोगों की आय और रोजगार पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा। इनमें खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसान शामिल हैं जो कृषि वानिकी से जुड़े हैं और कागज उद्योग को लुग्दी के लिये लकड़ी की आपूर्ति करते हैं।’’
सरकार को लिखे पत्र में आईपीएमए ने कागज पर आयात शुल्क को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की अपील की है। डब्ल्यूटीओ की ओर से इस पर शुल्क को बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक करने की अनुमति है।
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