देश की खबरें | द्रमुक ने तेलंगाना की राज्यपाल सुंदरराजन की टिप्पणी के लिए उनका मजाक उड़ाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु के सत्तारूढ़ दल द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने बुधवार को कहा कि तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन सरल और भोली महिला हैं। उसने उनकी ‘साहस’ संबंधी टिप्पणी का मजाक उड़ाया।

चेन्नई, 14 सितंबर तमिलनाडु के सत्तारूढ़ दल द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने बुधवार को कहा कि तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन सरल और भोली महिला हैं। उसने उनकी ‘साहस’ संबंधी टिप्पणी का मजाक उड़ाया।

पार्टी ने जानना चाहा कि क्या ‘‘डर के मारे तेलंगाना से भागकर तमिलनाडु में अपना बचाव करना साहसिक’’ है।

सुंदरराजन के एक बयान का हवाला देते हुए द्रमुक के मुखपत्र ‘मुरासोली’ ने आश्चर्य के साथ कहा कि भयभीत हो जाना, तेलंगाना से भाग जाना और बहादुर होने का दावा करना ‘‘किस प्रकार की वीरता है।’’

सुंदरराजन ने एक पुराने तमिल छंद को उद्धृत किया था जिसमें भूसी से चावल अलग करने वाले एक घरेलू औजार (पैन) की मदद से बाघ को भगा देने पर एक तमिल महिला की प्रशंसा की गयी है। उन्होंने इसका हवाला देते हुए कहा था कि तमिल महिलाओं की साहस की यह परंपरा उन्हें विरासत में मिली है और वह किसी बात से घबराती नहीं हैं।

उनकी इस टिप्पणी पर द्रमुक के तमिल दैनिक ने सवाल किया, ‘‘बाघ के डर से तेलंगाना से भागने के बाद तमिलनाडु में पैन को लहराना कैसी बहादुरी है। राज्यपाल सुंदरराजन को स्पष्ट करना चाहिए।’’

निर्वाचित सरकारों के साथ कथित टकराव पर राज्यपालों के विरूद्ध 12 सितंबर को मुरासोली द्वारा की गयी कड़ी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुंदरराजन ने कहा था कि उनका कभी अपमान नहीं किया गया।

उन्होंने ‘मुरासोली’ में आलेख प्रकाशित होने के बाद कहा था, ‘‘मेरा कभी अपमान नहीं किया गया। मैं इस बात से चकित हूं कि किसी अन्य राज्य में तमिलनाडु के लोगों की बहन का अपमान किया जाता है तो वहां (तमिलनाडु) कैसे कोई इस बात पर खुशी मना सकता है?’’

उनकी इस टिप्पणी पर द्रमुक मुखपत्र ने बुधवार को कहा कि उसने यह नहीं कहा कि हैदराबाद में उनका अपमान किया गया।

इस संबंध में मीडिया की खबरों एवं यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो का हवाला देते हुए द्रमुक दैनिक पत्र ने सवाल किया कि क्या वह एक ऐसे शब्द के इस्तेमाल से इनकार करती हैं जिसका मतलब होता है कि उन्हें ‘अपमानित’ किया गया।

तेलंगाना की घटनाओं का जिक्र करते हुए मुरासोली ने कहा कि यदि राज्यपाल पद पर नियुक्त किया गया व्यक्ति टकराव का मार्ग चुनता है तो उसका क्या नतीजा हो सकता है, यह तेलंगाना की घटनाओं से स्पष्ट हो गया है। उसने कहा कि राज्यपालों के पास असली ताकत नहीं होती है।

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