देश की खबरें | आईआईसीटी निदेशक मामले में खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश का आदेश दरकिनार किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक न्यायाधीश के 24 अक्टूबर, 2022 के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें डॉ. आलोक कुमार को भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी), भदोही के निदेशक के रूप में 65 वर्ष की उम्र पूरी होने तक काम करने की अनुमति दी थी।

प्रयागराज, छह फरवरी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक न्यायाधीश के 24 अक्टूबर, 2022 के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें डॉ. आलोक कुमार को भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी), भदोही के निदेशक के रूप में 65 वर्ष की उम्र पूरी होने तक काम करने की अनुमति दी थी।

विकास आयुक्त एवं अन्य द्वारा दायर विशेष अपील स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने कहा, “मौजूदा मामले में चिकित्सक आलोक कुमार ने अपनी नियुक्ति के उस नियम को स्वीकार करने के बाद आईआईसीटी के निदेशक का पदभार संभाला था कि वह 60 वर्ष की उम्र पूरी होने तक काम करते रहेंगे।”

अदालत ने कहा, “इसलिए उन्हें अनुमोदन एवं निंदा (जिसे मैं मंजूर करता हूं, उसे मैं नामंजूर नहीं कर सकता) की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति को या तो पूरा अनुबंध स्वीकार करना होगा या पूरी चीजें खारिज करनी होंगी।”

यूपी टेक्सटाइल टेक्नोलाजी इंस्टीट्यूट, कानपुर में प्रोफेसर डॉ. आलोक कुमार को 15 नवंबर, 2018 के आदेश के तहत आईआईसीटी का निदेशक नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति तीन वर्ष के लिए या 60 वर्ष की उम्र पूरी होने तक, जो भी पहले हो, के लिए थी।

उन्होंने नियुक्ति की शर्तों को स्वीकार करते हुए पद ग्रहण किया और तीन साल पूरा होने तक काम किया। इसके बाद, एक अप्रैल, 2022 के आदेश के तहत उन्हें छह माह (30 सितंबर, 2022 तक के लिए) का सेवा विस्तार दिया गया। इसके उपरांत निदेशक पद पर चयन के लिए 19 अगस्त, 2022 को एक विज्ञापन जारी किया गया।

डॉ. आलोक कुमार ने इस विज्ञापन को चुनौती देते हुए अदालत से इसे रद्द करने और सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष तक काम करते रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया। एकल न्यायाधीश ने 14 अक्टूबर, 2022 को उस विज्ञापन को रद्द करते हुए कहा था कि डॉ. आलोक कुमार सेवानिवृत्ति की उम्र तक आईआईसीटी के निदेशक पद पर काम करने के पात्र हैं।

विकास आयुक्त ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ इस आधार पर अपील की कि डॉ. आलोक कुमार ने प्रोफेसर के तौर पर काम करते हुए आईआईसीटी के निदेशक पद के लिए आवेदन किया और उनका चयन और नियुक्ति तीन वर्ष के लिए विशुद्ध रूप से अस्थायी आधार पर की गई थी।

विकास आयुक्त ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त के नियुक्ति के नियम स्वीकार किए थे। खंडपीठ द्वारा यह निर्णय 31 जनवरी, 2023 को दिया गया।

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