ताजा खबरें | राज्यसभा में अल्पसंख्यकों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर लाए गए गैर-सरकारी संकल्प पर चर्चा
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के अब्दुल वहाब द्वारा अल्पसंख्यकों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार को लेकर लाए गए एक गैर-सरकारी संकल्प पर राज्यसभा में चर्चा हुई और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों सहित करीब सभी विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से भी बदतर है।
नयी दिल्ली, 10 फरवरी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के अब्दुल वहाब द्वारा अल्पसंख्यकों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार को लेकर लाए गए एक गैर-सरकारी संकल्प पर राज्यसभा में चर्चा हुई और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों सहित करीब सभी विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से भी बदतर है।
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया।
वहाब का संकल्प सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन से संबंधित था। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उक्त रिपोर्टों के अनुसार भारत में मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से भी बदतर है।
उन्होंने सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्रा आयोग में मुसलमानों के शैक्षिक और सामाजिक विषयों की सिफारिशों के क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
संकल्प पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जॉन ब्रिटास ने संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि यह सरकार सबका साथ, सबका विकास की बात तो करती है लेकिन उसके कार्यों में यह दिखता नहीं है।
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने भी संकल्प का समर्थन किया और सरकार पर अल्पसंख्यकों की ‘‘घनघोर’’ उपेक्षा का आरोप लगाया।
उन्होंने केंद्र सरकार से अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाओं की मदों में कटौती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं की समीक्षा तक नहीं कर रही है।
उन्होंने मदरसा शिक्षकों को 55 महीने से वेतन ना मिलने का मुद्दा भी उठाया और कि इस सरकार को अपनी पक्षपातपूर्ण नीति बंद करनी चाहिए।
भाजपा के राकेश सिन्हा ने संकल्प का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ऐसी तमाम योजनाएं हैं जिनका लाभ समाज के हर वर्ग को मिल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लाभार्थियों में हर धर्म और जाति के लोग हैं।
कांग्रेस की जे. वी. माथेर ने भी संकल्प का समर्थन किया और कहा कि अल्पसंख्कों के हित में लाए गए इस संकल्प से सत्ताधारी दल को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने भी इसका समर्थन किया और कहा कि केंद्र सरकार का 20 प्रतिशत आबादी के प्रति दृष्टिकोण उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि अल्पसंख्यक कल्याण का बजट भी पूरा खर्च नहीं होता।
उन्होंने समाज में घृणा फैलाने को लेकर सत्ताधारी दलों की ओर से पूर्व में की गई बयानबाजियों का जिक्र किया और कहा कि इस देश में बुलडोजर को प्रतीक बनाए जाने का प्रयास किया रहा है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर, रोहिंग्याओं और फिलस्तीन जैसे मुद्दों को मुसलमानों के नजरिए से नहीं बल्कि मानवाधिकार के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
माकपा के वी शिवदासन ने भी इस संकल्प का समर्थन किया और कहा कि मौलाना आजाद छात्रवृति को खत्म कर दिया गया, जिससे अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर घृणा की राजनीति को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
भाकपा के संदोष कुमार पी. ने कहा कि संकल्प लाने वाले आईयूएमएल के सदस्य की पार्टी ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कुछ नहीं किया लेकिन इसके बावजूद वह इस संकल्प का समर्थन करते हैं। उन्होंने सरकार पर इस्लामोफोबिया फैलाने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी ने संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि इस बार के बजट में अल्पसंख्क कार्य मंत्रालय के बजट में 38 प्रतिशत की कटौती की गई है।
उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के सदस्य अल्पसंख्यकों के आर्थिक बहिष्कार और उनके खिलाफ बयानबाजी करते हैं लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का सबका साथ, सबका विश्वास का नारा खोखला है।
उन्होंने कहा कि सरकार की विचारधारा का समर्थन करने वाले अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को यह सरकार नवाजती है और दुनिया भर में भारत का झंडा बुलंद करने वाले शाहरूख खान के खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चलाया जाता है।
भाजपा के जी वी एल नरसिम्हा राव ने कहा कि वह इस संकल्प का घोर विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि सच्चर समिति ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में धर्म के आधार पर गिनती की थी और इसकी सिफारिशें विभाजन की प्रकृति की थी।
संकल्प पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी क्योंकि सभापति जगदीप धनखड़ ने आम बजट पर चर्चा शुरु करवा दी।
ब्रजेन्द्र अविनाश
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