नयी दिल्ली, 22 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को डायल की एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (आईजीआई) संचालित करता है। याचिका में वर्ष 2016-19 के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड की तरफ से मांगे गए करीब 2600 करोड़ रुपये के संपत्ति कर को चुनौती दी गई है।
बहरहाल, उच्च न्यायालय ने याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इंकार कर दिया है, जिसमें बोर्ड के 15 जून के आदेश पर स्थगन का आग्रह किया गया था या रुपये का भुगतान नहीं करने पर दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) द्वारा किसी कड़ी कार्रवाई को रोकने की मांग की गई है, जिसे मांगे जाने के 30 दिनों के अंदर भुगतान करना था।
मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने गृह मंत्रालय, रक्षा और विमानन मंत्रालय, दिल्ली कैंट बोर्ड (डीसीबी) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से 12 अगस्त तक उनका रूख पूछा है।
उच्च न्यायालय ने डायल के वकील द्वारा अंतरिम आदेश जारी करने के बार बार किए गए आग्रह को नामंजूर कर दिया।
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पीठ ने कहा कि अगर डीसीबी कोई कार्रवाई करता है तो डायल अदालत के समक्ष आवेदन दे सकता है।
अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनिल सोनी ने मंत्रालयों की तरफ से नोटिस को स्वीकार किया।
उन्होंने और डीसीबी ने डायल की तरफ से दी गयी स्थगन याचिका का विरोध किया और याचिका की सुनवाई पर भी सवाल उठाए।
याचिका में 15 जून को 2589,10,97,035 करोड़ रुपये की मांग को खारिज करने के अलावा यह भी घोषणा करने की मांग की गई कि जिस जमीन पर आईजीआई स्थित है वह कैंटोनमेंट बोर्ड का नहीं है और इसलिए यह डीसीबी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
याचिका में डीसीबी द्वारा पहले संपत्ति कर के तहत मांगी गई विभिन्न राशियों से जुड़े पत्रों को भी खारिज करने की मांग की गई।
याचिका के मुताबिक, हवाई अड्डे की जमीन का एक हिस्सा दक्षिण दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है जिसके लिए डायल नगर निकाय को संपत्ति कर का भुगतान करता है।
शेष हिस्से के लिए डीसीबी संपत्ति कर की मांग कर रहा है।
याचिका में कहा गया है कि 2016 में डीसीबी ने 9.01 करोड़ रुपये की मांग की थी जिसका डायल ने विरोध किया था।
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