जरुरी जानकारी | औद्योगिक भूमि आवंटन के लिए विकास प्राधिकरणों में समय-सीमा तय

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लखनऊ, 20 जुलाई उत्तर प्रदेश में 'कारोबार में आसानी' बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के तहत विभिन्न श्रेणियों की निवेश परियोजनाओं के लिए जमीन के आवंटन के लिए समयसीमा तय कर दी है।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना के निर्देश पर सरकार ने 'उ. प्र. औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017' के तहत विभिन्न श्रेणियों की निवेश परियोजनाओं के लिए भूखंडों के आवंटन के लिए समयसीमा निर्धारित कर दी है।

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उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में आज जारी शासनादेश के मुताबिक मेगा, मेगा प्लस और सुपर मेगा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए निवेशक या उद्यमी से आवेदन प्राप्त होने के बाद भूमि का आवंटन फास्ट-ट्रैक मोड से अधिकतम 15 दिनों में किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त ई-नीलामी के जरिये भूमि आवंटन के लिए मासिक भूमि आवंटन चक्र अपनाया जाएगी। यानी बतायी गयी तारीख तक प्राप्त आवेदनों पर आवंटन उस माह की अंतिम तिथि तक कर दिया जाएगा। योजना बनाकर आवेदन मांगे जाने की दशा में निर्धारित तिथि तक आवेदन प्राप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर बैच-वार भूमि आवंटन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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महाना ने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनेक बहु-राष्ट्रीय और राष्ट्रीय कम्पनियों के निवेश प्रस्ताव, विशेष रूप से डिफेंस व एयरोस्पेस, लाॅजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग एवं इलेक्ट्राॅनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों से प्राप्त हो रहे हैं, लिहाजा न केवल ईज़ आफ डूइंग बिज़नेस में सुधार, बल्कि राज्य में बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भी एक पारदर्शी व्यवस्था के अधीन भूमि की सुनिश्चित उपलब्धता व समयबद्ध आवंटन आवश्यक है।

मंत्री ने कहा कि सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरण जीआईएस आधारित एक सुदृढ़ लैण्ड बैंक की स्थापना कर रहे हैं, जिससे सम्भावित निवेशक अपनी पसंद के अनुसार भूमि का चयन पारदर्शी रूप से आनलाइन कर सकें।

अपर मुख्य सचिव (अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास) आलोक कुमार ने कहा कि राज्य के सभी प्रमुख औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया गया है कि वे औद्योगिक इकाइयों की विभिन्न श्रेणियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा के अनुसार निवेशकों को भूमि आवंटन सुनिश्चित करें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मेगा, मेगा प्लस एवं सुपर मेगा औद्योगिक इकाइयों हेतु फास्ट-ट्रैक मामलों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) के आधार पर ही निवेश का आकलन किया जाएगा। इसके लिए दो करोड़ रुपये का न्यूनतम प्रति एकड़ मानदंड निर्धारित किया गया है ताकि निवेशक द्वारा वास्तविक आवश्यकता से अधिक भूमि न प्राप्त की जाए।

यह निर्देश नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा), यू.पी. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा), गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा), सतहरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण (सीडा) और दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (डीएमआईसी आईआईटीजीएनएल) को दिये गए हैं।

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