देश की खबरें | मायावती के ‘दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार, लालच’ के बावजूद बसपा की ‘राजनीतिक ताकत बरकरार’ रही: उदित राज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्व सांसद उदित राज ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके ‘‘दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और लालच’’ के बावजूद उनकी ‘‘राजनीतिक ताकत लंबे समय तक बरकरार रही’’।

लखनऊ, 18 फरवरी पूर्व सांसद उदित राज ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके ‘‘दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और लालच’’ के बावजूद उनकी ‘‘राजनीतिक ताकत लंबे समय तक बरकरार रही’’।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘जिस तरह दलितों की हालत खराब थी, आज मुस्लिम समुदाय भी उसी दौर से गुजर रहा है।’’

राज ने सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से कहा, ‘‘1980 के दशक के बाद कांशीराम जी ने उत्तर प्रदेश में बहुजन जागरण की शुरुआत की, जो 2000 के दशक में अपने चरम पर पहुंच गया। भले ही आंदोलन की परिणति राजनीति में हुई, लेकिन इसकी सोच और आधार सामाजिक न्याय रहा है। अन्य राजनीतिक दल राजनीति से शुरू करते हैं और राजनीति पर ही खत्म होते हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी के साथ ऐसा नहीं था।’’

मायावती पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मायावती की क्रूरता और अक्षमता के बावजूद कार्यकर्ता और मतदाता लड़ते रहे। कार्यकर्ताओं के घर बिक गए, उनके बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पाई और उनके साथ क्रूरता की गई, फिर भी वे बहुजन राज लाने के लिए संघर्ष करते रहे। फुले, शाहू, आंबेडकर (महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले, राजर्षि शाहू महाराज, बी. आर. आंबेडकर) को मानने वाले लाखों कार्यकर्ता निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। कुछ लोगों ने अपने स्तर पर छोटे-छोटे संगठन बनाए हैं, लेकिन उनकी (फुले, शाहू, आंबेडकर की) सोच मरी नहीं है।’’

उत्तर पश्चिमी दिल्ली के पूर्व लोकसभा सदस्य ने यह भी कहा, ‘‘जिस तरह दलितों की हालत खराब थी, उसी तरह आज मुस्लिम समुदाय भी उसी दौर से गुजर रहा है। मुस्लिम समुदाय अकेले इस स्थिति से नहीं लड़ सकता। दलित भी अकेले सक्षम नहीं हैं। जब भी मुस्लिम समुदाय अपनी समस्या उठाता है, तो उसका नतीजा सांप्रदायिकता में बदल जाता है।’’

उन्होंने कहा कि एक दिसंबर 2024 को दिल्ली के रामलीला मैदान में डोमा परिसंघ की पहली रैली होगी, जिसमें वक्फ बोर्ड को बचाने की मांग उठाई जाएगी।

पूर्व लोकसभा सदस्य वर्तमान में दलित, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग), अल्पसंख्यक और आदिवासी (डीओएमए) परिसंघ के प्रमुख हैं।

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