देश की खबरें | दिल्ली हिंसा : उच्च न्यायालय का वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा जांच दल को दिए आदेश की प्रति पेश करने का निर्देश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपनी टीम को दिये गए उस आदेश की एक प्रति दायर करने का निर्देश दिया, जिसे इस साल दिल्ली दंगों के दौरान कथित रूप से मारे गए दो पीड़ितों के परिवार वालों ने चुनौती दी है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपनी टीम को दिये गए उस आदेश की एक प्रति दायर करने का निर्देश दिया, जिसे इस साल दिल्ली दंगों के दौरान कथित रूप से मारे गए दो पीड़ितों के परिवार वालों ने चुनौती दी है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि एक खबर के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक दावे के समर्थन में कोई प्रमाणिकता पेश नहींकी की जाए। एक खबर के आधार पर याचिका दाखिल की गई थी।

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उच्च न्यायालय साहिल परवेज और मोहम्मद सईद सलमानी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (अपराध एवं आर्थिक अपराध शाखा) का आठ जुलाई का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया है।

परवेज के पिता की कथित तौर पर दंगाइयों ने उनके घर के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी थी जबकि सलमानी की ताई के घर में घुसकर कथित दंगाइयों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

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याचिकाकर्ताओं के वकील महमूद प्राचा ने पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया कि वह विशेष आयुक्त प्रवीर रंजन के आठ जुलाई का आदेश और अधिकारियों द्वारा दिए गए ऐसे आदेशों को प्रस्तुत करे जोकि पुलिस अधिकारियों की जांच के काम में एक गैरकानूनी और अवैध हस्तक्षेप करता है।

याचिका में दावा किया गया, '' इन दबाव में स्पष्ट रूप से, प्रतिवादी संख्या 4 (विशेष आयुक्त) ने 8 जुलाई को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि कुछ हिंदू व्यक्तियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हिंदू समुदाय में रोष व्याप्त था और जांच अधिकारियों को निर्देश देना कि भविष्य में गिरफ्तारी करते समय उन्हें सतर्क रहना चाहिए और व्यक्तियों की गिरफ्तारी विशेष लोक अभियोजकों के साथ साक्ष्यों की चर्चा के बाद ही की जानी चाहिए, जिन्हें इन मामलों में पुलिस का प्रतिनिधित्व करने के लिए अवैध रूप से नियुक्त किया गया है।''

याचिका में इस तरह के गैरकानूनी आदेशों को रद्द करने का भी अनुरोध किया गया ताकि कानून के दायरे में जांच हो सके।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस याचिका को दायर करने के बजाय याचिकाकर्ता आरटीआई आवेदन के जरिए आठ जुलाई का आदेश प्राप्त कर सकते थे और पहले उन्हें दस्तावेज को पढ़ लेना चाहिए था।

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