नयी दिल्ली, 12 जुलाई पूर्वोत्तर दिल्ली में 2020 में हुए दंगों से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही एक अदालत ने बिना अनुमति के तीर्थयात्रा पर जाने तथा इसके कारण अदालत की कार्यवाही का 'जानबूझकर' स्थगन करवाने के लिए एक आरोपी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला, गोकलपुरी पुलिस थाने द्वारा सोनू सहित छह अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। मामले में अभियोजन पक्ष्य की ओर से साक्ष्य पेश किए जा रहे हैं।
न्यायाधीश ने कहा कि जमानत पर रिहा सोनू अदालती कार्यवाही के दौरान अनुपस्थित था।
सोनू के वकील ने पेशी से छूट की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया और कहा कि आरोपी इसलिए पेश नहीं हुआ क्योंकि वह अमरनाथ यात्रा पर गया था।
एएसजे प्रमाचला ने मंगलवार को पारित एक आदेश में कहा, "सभी आरोपियों के लिए आज की तारीख की घोषणा बहुत पहले ही कर दी गई थी। आरोपी सोनू ने आज की तारीख की जानकारी होने के बावजूद, बिना किसी अनुमति के दिल्ली से बाहर जाने का विकल्प चुना।"
उन्होंने कहा कि आरोपी अदालती कार्यवाही की जानकारी होने के बावजूद अनुपस्थित था और उसने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की जिससे अदालती कार्यवाही उसकी अनुपस्थिति में संपन्न हो सके।
न्यायाधीश ने इस बात को यह रेखांकित किया कि यह एक पूर्व नियोजित यात्रा थी और कोई आपात स्थिति नहीं थी। उन्होंने कहा, "इन परिस्थितियों में, मैं आरोपी सोनू की अनुपस्थिति के कारणों से संतुष्ट नहीं हूं, जिसके कारण आज भी मामले में स्थगन हो रहा है।"
अदालत ने सोनू द्वारा "जानबूझकर की गई कार्रवाई" कारण अदालत की कार्यवाही का स्थगन किए जाने के चलते उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
अदालत ने सोनू कारण बताओ नोटिस भी जारी किया कि निजी बांड की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए उनकी जमानत रद्द क्यों नहीं की जानी चाहिए?
मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी।
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