देश की खबरें | दिल्ली दंगा : अदालत ने महिलाओं की कथित हत्या पर प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर रोक लगायी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को एक आदेश पर सुनवाई की अगली तारीख तक के लिए रोक लगा दी जिसमें एक व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। व्यक्ति ने अपनी याचिका में दावा किया था कि फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान उनके सामने बुरका पहनी हुई महिलाओं की हत्याएं हुई थीं ।
नयी दिल्ली, छह नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को एक आदेश पर सुनवाई की अगली तारीख तक के लिए रोक लगा दी जिसमें एक व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। व्यक्ति ने अपनी याचिका में दावा किया था कि फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान उनके सामने बुरका पहनी हुई महिलाओं की हत्याएं हुई थीं ।
मजिस्ट्रेटी अदालत ने 26 अक्टूबर को कहा था कि पुलिस इस आधार पर शिकायतकर्ता निसार अहमद के आरोपों की जांच के लिए मामला दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती कि शिकायत को कुछ अन्य मामलों के साथ कथित तौर पर जोड़ दिया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश के खिलाफ पुलिस द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर अहमद को नोटिस जारी किया।
अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 19 नवंबर तक मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। मजिस्ट्रेटी अदालत ने कहा था कि वह यह नहीं स्वीकार कर पा रही है कि पुलिस बिना पूरी जांच किए कैसे दावा कर सकती है कि अहमद के आरोप फर्जी हैं।
अहमद ने दावा किया था उन्होंने बुरका पहनी हुए कुछ महिलाओं या मुस्लिमों की तरह नजर आ रही महिलाओं की हत्याएं होते हुए और उनके शव को भागीरथी नाले में लोगों को फेंकते हुए देखा था।
पुलिस ने अपने जवाब में कहा था कि अहमद की शिकायत को आस मोहम्मद की शिकायत के साथ जोड़ दिया है, जिसमें आस मोहम्मद ने आरोप लगाया कि 25 फरवरी को अज्ञात दंगाइयों ने उनके साथ लूटपाट की और चोरी के मामले की प्राथमिकी दर्ज की गयी। अहमद के वकील ने कहा था कि मोहम्मद की शिकायत उनकी शिकायत से अलग है।
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