देश की खबरें | दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने यमुना पुनरुद्धार के लिए पीएमओ को कार्य योजना सौंपी
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नयी दिल्ली, 19 फरवरी दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के साथ ही यमुना नदी के पुनरुद्धार के लिए एक कार्य योजना प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को सौंप दी गई है, जिसमें सीवेज शोधन क्षमता बढ़ाने और अन्य महत्वपूर्ण उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पर्यावरण विभाग के अंतर्गत दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री कार्यालय को यमुना की सफाई और पुनरुद्धार के संबंध में एक दस्तावेज सौंपा था।
इस योजना में प्रमुख उपायों की रूपरेखा भी दी गई है, जिसमें प्रमुख नालों की निकासी, नये सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) की स्थापना, झुग्गी झोपड़ी बस्तियों में जल निकासी प्रणाली को जोड़ना, सामान्य अपशिष्ट शोधन संयंत्रों को उन्नत करना, तटवर्ती इलाकों से अतिक्रमण हटाना और नदी तट का सौंदर्यीकरण शामिल है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान, यमुना की सफाई का मुद्दा चर्चा के केन्द्र में था। भाजपा ने तत्कालीन सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी (आप) पर इसके 10 साल के शासन के दौरान नदी के पुनरुद्धार में विफल रहने का आरोप लगाया था।
पिछले सप्ताह पीएमओ को भेजे गए दस्तावेज के अनुसार, डीपीसीसी ने शहर में पल्ला से असगरपुर गांव तक यमुना के 48 किलोमीटर लंबे हिस्से को ‘‘प्राथमिकता-1’’ (सर्वोच्च प्राथमिकता वाले) प्रदूषित हिस्से के रूप में वर्गीकृत किया है।
दस्तावेज में जताई गई एक प्रमुख चिंता उच्च बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) स्तर है, जो 3 मिलीग्राम प्रति लीटर के निर्धारित मानक से बहुत अधिक है। जल गुणवत्ता में सुधार के लिए, दस्तावेज में 23 क्यूमेक्स (क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड) के न्यूनतम पर्यावरणीय जल प्रवाह की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
हालांकि, पानी की मौजूदा कमी के कारण, दिल्ली में यमुना में मौजूदा जल प्रवाह लगभग शून्य है। रिपोर्ट के अनुसार, रेणुका, लखवार और किशाऊ सहित लंबित बांध परियोजनाएं इस अंतर को पाटने में मदद कर सकती हैं।
प्रदूषण को रोकने की योजना में 100 प्रतिशत सीवेज शोधन पहल शामिल है, जिसमें 37 मौजूदा एसटीपी को उन्नत करना शामिल है।
शहर की सीवेज शोधन क्षमता 2023 में 792 एमजीडी से दिसंबर 2026 तक 964.5 एमजीडी तक बढ़ाने की योजना है, जिसमें दिल्ली गेट पर एक नया एसटीपी और 40 विकेन्द्रीकृत एसटीपी (डीएसटीपी) की योजना बनाई गई है।
इसके अतिरिक्त, दिसंबर 2026 तक 14 मौजूदा एसटीपी को उन्नत करने की भी योजना है।
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