देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रगति मैदान के निकट झुग्गियों को तोड़े जाने पर रोक लगाई

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नयी दिल्ली, 14 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा प्रगति मैदान के आसपास की झुग्गियों को तोड़े जाने पर मंगलवार को रोक लगा दी और इस मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि प्रगति मैदान के गेट नंबर-एक के पास जनता कैंप नामक झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) क्लस्टर को लेकर पीडब्ल्यूडी, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) और रेलवे "अलग-अलग स्वर में बोल रहे थे।"

अदालत ने इस मामले में आम सहमति पर पहुंचने के लिए संबंधित अधिकारियों को एक बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि जमीन किसकी है और क्या यह स्लम क्लस्टर राज्य सरकार की 2015 की पुनर्वास नीति के तहत कवर किया गया था।

न्यायमूर्ति सिंह ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह निर्देश दिया जाता है कि मुख्य सचिव के कार्यालय में एक बैठक आयोजित की जाए, जिसमें सभी संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित हों। (इस मामले में) फैसला लिया जाए और रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाया जाए। तब तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। मुख्य सचिव के कार्यालय में 16 फरवरी को बैठक आयोजित की जाए।’’

जेजे क्लस्टर के निवासियों ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह अधिसूचित क्लस्टर था और इसलिए किसी भी तोड़फोड़ से पहले निवासियों का संबंधित नीति के अनुसार पुनर्वास किया जाना चाहिए था।

अदालत को सूचित किया गया कि पीडब्ल्यूडी ने 28 जनवरी को झुग्गियों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी किया था।

डीयूएसआईबी ने कहा कि संबंधित भूमि रेलवे की है और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुसार झुग्गीवासियों को रैन बसेरों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था।

दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित मंत्री पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि जब तक पुनर्वास पर उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

रेलवे ने कहा कि इसने किसी भी तोड़फोड़ का आदेश नहीं दिया है और भूमि के स्वामित्व के लिए भौतिक सत्यापन आवश्यक है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तारीख मुकर्रर की।

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