देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग नियमों के खिलाफ जनहित याचिका पर केंद्र का रुख मांगा

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नयी दिल्ली, 12 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम, 2023 की संवैधानिक और विधायी वैधता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र का रुख जानना चाहा।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने केंद्र सरकार से गैर-सरकारी संगठन ‘सोशल ऑर्गनाइजेशन फॉर क्रिएटिंग ह्यूमेनिटी’ (एसओसीएच) की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा और मामले को 21 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि यह याचिका कोई जनहित याचिका नहीं है, बल्कि एक ‘प्रॉक्सी पर्सनलाइज्ड’ याचिका है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रीतिन राय और वकील अक्षत गुप्ता ने दलील दी कि ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के लिए केंद्र नहीं, बल्कि राज्य सरकार सक्षम प्राधिकारी है।

वकीलों ने कहा कि गतिविधि को एक स्वतंत्र निकाय द्वारा विनियमित किया जाना चाहिए।

एएसजी शर्मा ने सवाल किया कि क्या कोई एनजीओ जनहित याचिका दायर करके कानून बनाने की केंद्र की क्षमता को चुनौती दे सकता है।

उन्होंने कहा, ''हम (केंद्र का रुख) दाखिल करेंगे। हम तथ्यों को रिकॉर्ड पर लाएंगे।''

याचिका में कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम केंद्र सरकार की विधायी क्षमता से परे है और संविधान राज्यों को जुए और सट्टेबाजी पर कानून बनाने की विशेष शक्तियां देता है।

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