देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला के खिलाफ अपराध के मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द की

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नयी दिल्ली, छह नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला की शुचिता को भंग करने और अन्य अपराध के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए आरोपी को 25 हजार रुपये का अदालत खर्च जमा करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि दोनों पक्षों ने सौहार्द्रपूर्ण तरीके, इच्छा से और बिना द्वेष के अपने विवाद को स्वयं सुलझा लिया है और ऐसे में इस प्रक्रिया को जारी रखने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी।

न्यायमूर्ति ने कहा कि प्राथमिकी को रद्द करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है और इसे जारी रखने से दोनों पक्षों में और तनातनी पैदा होगी।

अदालत ने रेखांकित किया कि आरोपी याचिकाकर्ता ने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी है और भरोसा दिया है कि इस तरह का दुर्व्यवहार नहीं होगा। साथ ही उसने अफसोस जताने के लिए मुकदमा खर्च जमा करने की बात कही है।

अदालत ने 29 अक्टूबर को दिए आदेश में कहा,‘‘इसलिए दिल्ली के वसंत विहार थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा-354, 341, 50 के तहत दर्ज प्राथमिकी रद्द की जाती है और इसके बाद से मामले की सभी कार्रवाई खत्म की जाती है जो याचिकाकर्ता द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय कर्मचारी कल्याण कोष में आज से चार हफ्ते के भीतर 25 हजार रुपये पर निर्भर करेगा।’’

इससे पहले अदालत को सूचित किया गया था याचिकाकर्ता ने महिला को धमकी दी थी कि वह उसके पति और बच्चों और हर उस व्यक्ति की हत्या कर देगा जो उनके बीच आएगा। यहां तक आरोपी रात को महिला के कमरे के आस-पास टहलता था।

पुलिस ने मामले की जांच की और वर्ष 2015 में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई लंबित थी।

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