देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर को दी विदाई

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नयी दिल्ली, 31 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर को उनकी सेवानिवृत्ति को लेकर शुक्रवार को उन्हें विदाई दी।

न्यायमूर्ति भटनागर 14 जून को सेवानिवृत्त होंगे। ग्रीष्मावकाश के लिए उच्च न्यायालय के बंद होने से पहले शुक्रवार अंतिम कार्य दिवस था, इसलिए दो हफ्ते पहले विदाई समारोह आयोजित किया गया।

इस मौके पर न्यायमूर्ति भटनागर ने कहा, ‘‘यूनानी दार्शनिक एपिकुरस के लिए, जीवन एक भोज की तरह है और उनका मानना था कि जिस व्यक्ति ने भरपेट खा लिया हो, उसे भोजन खत्म हो जाने की शिकायत नहीं करनी चाहिए, बल्कि शालीनतापूर्वक अपनी कुर्सी पीछे कर लेनी चाहिए, ताकि अन्य व्यक्ति वहां उसकी जगह ले सके।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि मुझे अभी भी आधी रात के नाश्ते के लिए रसोई में घुसने का कोई रास्ता मिल जाए, लेकिन अब समय आ गया है कि मैं अपनी कानूनी कुर्सी को पीछे कर लूं। मैं नहीं जानता कि मेरी जगह पर कौन आएंगे, लेकिन मैं उन्हें इसकी शुभकामना देता हूं। मैं अपनी यादों को अपने साथ ले जा रहा हूं, जिन्हें मैं हमेशा संजो कर रखूंगा।’’

न्यायमूर्ति भटनागर की सेवानिवृत्ति के साथ उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या घटकर 39 रह गई है, जबकि कुल आवंटित संख्या 60 है।

न्यायमूर्ति भटनागर 13 साल तक वकालत के पेशे से जुड़े रहे थे और 24 वर्ष एक न्यायिक अधिकारी रहे हैं। वह उच्च न्यायालय की उस खंडपीठ का हिस्सा थे, जिसने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े व्यापक षडयंत्र मामले में उमर खालिद की जमानत अर्जी अक्टूबर 2022 में खारिज कर दी थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने कहा कि न्यायमूर्ति भटनागर ने जिला न्यायपालिका के अपने लंबे अनुभव से पीठ को लाभान्वित किया और यह उनके न्यायिक निर्णयों में भी प्रदर्शित हुआ।

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, ‘‘अधीनस्थ अदालतों में प्राप्त वाद की प्रकृति और वादियों के स्वभाव की गहरी समझ न्यायाधीश की संपत्ति है, भले ही न्यायिक पदानुक्रम में वह किसी भी पायदान पर हों।’’

न्यायमूर्ति भटनागर का जन्म 14 जून 1962 को हुआ था और उन्होंने 1983 में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से बीएससी की डिग्री ली और इसके बाद इसी विश्वविद्यालय के ‘कैम्पस लॉ सेंटर’ से एलएलबी की उपाधि ली थी।

वकालत के पेशे के लिए 1987 में उन्होंने अपना पंजीकरण कराया था और 2000 में दिल्ली उच्चतर न्यायपालिका में शामिल हुए थे। वह 27 मई 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत हुए थे।

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