नयी दिल्ली, 12 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने संकट में घिरी एयरलाइन गो फर्स्ट को पट्टे पर लिए गए विमानों का रखरखाव करने की बुधवार को अनुमति देते हुए कहा कि विमान आपूर्तिकर्ता समय-समय पर इन विमानों का मुआयना कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अगुवाई वाली एक खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर समाधान पेशेवर की अपील पर यह निर्णय सुनाया। एकल पीठ ने पांच जुलाई के आदेश में पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों को महीने में दो बार विमानों का मुआयना करने और रखरखाव की अनुमति दी थी।
इस अंतरिम आदेश के खिलाफ गो फर्स्ट की कर्ज समाधान प्रक्रिया के लिए नियुक्त समाधान पेशेवर ने खंडपीठ के समक्ष अपील की थी।
इसके साथ ही खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि नागर विमानन क्षेत्र का नियामक डीजीसीए अपना परिचालन दोबारा शुरू करने के संदर्भ में एयरलाइन की तरफ से पेश पुनरुद्धार योजना पर कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है।
वित्तीय संकट में फंसने के बाद गो फर्स्ट ने तीन मई से ही अपनी उड़ानें बंद रखी हैं। इसके साथ ही उसके अनुरोध पर कर्ज समाधान प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
एयरलाइन को पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों ने न्यायालय में याचिका दायर कर रखरखाव करने की अनुमति मांगी थी। इस पर न्यायालय ने एयरलाइन और डीजीसीए को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
प्रेम
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