देश की खबरें | दिल्ली सरकार ने तीन कैग रिपोर्ट उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए नहीं भेजी : सूत्र

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली सरकार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की तीन रिपोर्ट अभी तक उपराज्यपाल वी के सक्सेना को नहीं सौंपी है, ताकि मंजूरी के बाद उन्हें विधानसभा में पेश किया जा सके। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 16 जनवरी दिल्ली सरकार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की तीन रिपोर्ट अभी तक उपराज्यपाल वी के सक्सेना को नहीं सौंपी है, ताकि मंजूरी के बाद उन्हें विधानसभा में पेश किया जा सके। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

दिल्ली सरकार की ओर से इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों ने कहा कि दिल्ली सरकार के लेखा नियंत्रक ने मामले पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कार्यालय को स्मरण पत्र भेजा है और उपराज्यपाल सचिवालय ने भी सरकार को पत्र लिखा है।

सूत्रों ने कहा कि 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष के लिए जो तीन रिपोर्ट उपराज्यपाल को नहीं सौंपी गई हैं, उनमें ‘‘राज्य वित्त लेखा ऑडिट रिपोर्ट’’, ‘‘दिल्ली में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम पर प्रदर्शन ऑडिट’’ और ‘‘राजस्व, आर्थिक, सामाजिक और सामान्य क्षेत्र और पीएसयू’’ शामिल है।

उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट सिसोदिया के कार्यालय के पास लंबित हैं, जिनके पास वित्त विभाग है। पिछले साल 23 जून, 27 सितंबर और 10 नवंबर को दिल्ली सरकार को ये रिपोर्ट सौंपी गई थीं।

एक सूत्र ने कहा कि सरकार के वित्त, धन के इस्तेमाल और विभिन्न कार्यक्रमों पर व्यय को लेकर दो रिपोर्ट के अलावा, वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम से संबंधित रिपोर्ट राजधानी में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निर्धारित नियमों के अनुसार, कैग अपनी रिपोर्ट दिल्ली सरकार को सौंपता है, जो वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद उन्हें उपराज्यपाल को विधानसभा में रखने की सिफारिश करने के लिए भेजती है।

सूत्र ने आगे दावा किया कि इससे पहले आम आदमी पार्टी (आप) नीत सरकार ने कैग की 10 रिपोर्ट को लंबित रखा था और लगातार चार साल तक उन्हें विधानसभा के समक्ष पेश नहीं किया था।

सूत्र ने कहा कि उपराज्यपाल सक्सेना द्वारा मामले पर गौर करने के बाद रिपोर्ट पेश करने के लिए दो दिवसीय सत्र बुलाया गया था। सूत्र ने कहा कि यह ‘आप’ नीत सरकार की ‘‘पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के प्रति लगातार उपेक्षा और अवहेलना’’ को दर्शाता है।

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