देश की खबरें | यमुना पर समिति प्रमुख के रूप में उपराज्यपाल की नियुक्ति के खिलाफ दिल्ली सरकार न्यायालय पहुंची

नयी दिल्ली, 24 मई केंद्र और राष्ट्रीय राजधानी की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार में जारी विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना को यमुना से संबंधित एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।

एनजीटी ने इस बात पर गौर करते हुए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था कि यमुना नदी के कायाकल्प के लिए काफी काम अधूरा रह गया है, और दिल्ली के उपराज्यपाल से समिति की अध्यक्षता करने का अनुरोध किया था।

याचिका में यह दलील दी गई है कि उपराज्यपाल तीन विषयों-पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि को छोड़कर केवल एक नाममात्र के प्रमुख हैं। उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में एनजीटी के आदेश को रद्द करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच प्रशासनिक सेवाओं के विवाद पर उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि एनजीटी के आदेशों का प्रभाव एक प्राधिकारी को कार्यकारी शक्तियां प्रदान करना नहीं हो सकता है, जिसे संवैधानिक योजना के तहत इन्हें प्रदान नहीं किया जा सकता है।

याचिका में दलील दी गई है, ‘‘वर्तमान अपील से संबंधित मुद्दे विधानसभा को प्रदत्त विधायी शक्तियों के दायरे में हैं और संविधान में दिए गए किसी भी अपवाद के अंतर्गत नहीं आते हैं।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘निर्वाचित सरकार यमुना को किसी भी प्रकार के प्रदूषकों से मुक्त कर एक स्वच्छ नदी बनाने और आवश्यक धन आवंटित करने के मुद्दे पर काम करने की इच्छुक है। हालांकि इस विवादित आदेश के तहत मौजूदा योजना में गैर-निर्वाचित व्यक्ति की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीटीडी) की निर्वाचित और लोकप्रिय रूप से जवाबदेह सरकार को नजरअंदाज किया गया है।’’

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