देश की खबरें | दिल्ली की अदालत ने आठ साल पुराने सामूहिक बलात्कार मामले में चार आरोपियों को बरी किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने महिला के यौन उत्पीड़न के लगभग आठ साल पुराने मामले में चार व्यक्तियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेहपूर्ण था और आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।

नयी दिल्ली, 14 दिसंबर दिल्ली की एक अदालत ने महिला के यौन उत्पीड़न के लगभग आठ साल पुराने मामले में चार व्यक्तियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेहपूर्ण था और आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजिंदर सिंह चार आरोपियों के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिनमें से एक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और अन्य के खिलाफ धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अभियोजन के अनुसार घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली महिला 25 जनवरी 2016 को किसी से मिलने के लिए अपने नियोक्ता के घर से निकली थी, जिसके बाद एक आरोपी उसे पश्चिमी दिल्ली में अपने कमरे में ले गया, जहां उसने और उसके साथियों ने कथित तौर पर दो बार महिला से बलात्कार किया।

अदालत ने अभियोजन पक्ष के बयान पर गौर किया गया, जिसमें कहा गया है कि महिला 26 जनवरी 2016 को सुबह सात बजे तक आरोपियों के साथ थी।

बयान में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष का एक गवाह मदद की गुहार सुनने के बाद महिला को एक एनजीओ के पास ले गया। इसके बाद वह 31 जनवरी को पीड़िता से मिला, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।

अदालत ने 11 दिसंबर के अपने आदेश में कहा, “यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अभियोजन पक्ष का गवाह 26 जनवरी की शाम से 31 जनवरी तक कहां था। उसके ठिकाने के बारे में स्पष्टीकरण नहीं देने और मामले की सूचना देने में देरी के कारण अभियोजन पक्ष का मामला संदिग्ध हो जाता है।”

न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष का गवाह अदालत में सभी आरोपियों को पहचानने में विफल रहा और आरोपियों को बलात्कार की कथित घटना से जोड़ने के लिए कोई फोरेंसिक या मेडिकल साक्ष्य नहीं है।

न्यायाधीश ने कहा, “अभियोजन पक्ष अपने मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, लिहाजा आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।”

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