ताजा खबरें | दिल्ली निगम विधेयक चर्चा तीन लोस
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि अगर पार्टी को मजबूत करने का ही इरादा होता तो 2017 के निगम चुनाव से पहले भी यह फैसला किया जा सकता था, लेकिन तब केंद्र ने इंतजार किया कि शायद दिल्ली सरकार सहयोग करेगी।
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी को मजबूत करने का ही इरादा होता तो 2017 के निगम चुनाव से पहले भी यह फैसला किया जा सकता था, लेकिन तब केंद्र ने इंतजार किया कि शायद दिल्ली सरकार सहयोग करेगी।
वर्मा ने कहा कि 2011 में निगमों को विभाजित करने का तत्कालीन कांग्रेस सरकार फैसला गलत था और दिल्ली की जनता ने कुछ ही दिन बाद हुए तीन निगमों के चुनाव में भाजपा को जिताकर यह साबित कर दिया था।
उन्होंने केंद्र से मांग की कि नगर निगमों के एकीकरण के बाद दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली परिवहन निगम जैसी संस्थाओं के अधिकार दिल्ली नगर निगम को दिये जाने चाहिए।
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने कहा कि दिल्ली में नगर निगमों के चुनाव की घोषणा से कुछ घंटे पहले क्या ऐसा हुआ कि एकीकरण का फैसला लिया गया? उन्होंने कहा कि इससे थोड़ा संदेह पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि संसद में निगमों और विधानसभाओं के मुद्दों पर बात नहीं होनी चाहिए।
सुले ने इस सरकार में सहयोगात्मक संघवाद कम होने और अधिकारों का केंद्रीयकरण बढ़ने का आरोप लगाया।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए माकपा के ए एम आरिफ ने केंद्र सरकार पर दिल्ली के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया और कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों के हित में निगमों के एकीकरण के विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह को नक्शे बदलने की आदत हो गई है, वह हर चीज को नियंत्रित करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि जब एक महीने बाद तीनों निगमों का चुनाव होने वाला था तो फिर आनन-फानन में विधेयक लाने की क्या जरूरत थी?
जारी वैभव हक दीपक
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)