देश की खबरें | दिल्ली-केंद्र विवाद : सेवाओं के नियंत्रण के संवैधानिक मुद्दे पर निर्णय करेंगे- न्यायालय

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नयी दिल्ली, 11 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच ‘‘राजनीतिक टकराव के वास्तविक क्षेत्र’’ से हटेगा और केवल राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण से जुड़े संवैधानिक मुद्दे पर विचार करेगा।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने राजनीतिक नूराकुश्ती को अदालत में घसीटने को 'अनावश्यक' करार देते हुए स्पष्ट किया कि वह दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से दायर नये हलफनामे पर केंद्र को जवाब देने के लिए नहीं कहेगी।

दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘‘यह मामला संविधान पीठ के समक्ष है। हमने प्रशासनिक पंगुता दिखाने के लिए एक हलफनामा दायर किया है। आज कोई नौकरशाह मंत्रियों की बात का जवाब नहीं दे रहा है।’’

उन्होंने कहा कि वह केवल कुछ तथ्यों को अदालत के संज्ञान में ला रहे हैं।

पीठ ने सिसोदिया के हलफनामे पर केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन के पुरजोर विरोध का संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि यह हलफनामा तब दायर किया गया है, जब संबंधित मामले की सुनवाई की तारीख पहले से ही तय है।

विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘यह एक बहुत ही गलत प्रथा है। यह हलफनामा राजनीतिक प्रचार दिखाता है और इसे दायर किए जाने से पहले प्रेस के साथ साझा किया गया था।’’

जैन ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया का पूरी तरह से दुरुपयोग है, इतना ही नहीं, हलफनामे में केंद्र से एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को भी कहा गया है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम अभी जवाब नहीं मांगेंगे, अन्यथा लोग अंतिम तिथि तक हलफनामा दाखिल करना शुरू कर देंगे। हम अभी याचिकाओं पर रोक लगा देंगे। संविधान पीठ को मामले की सुनवाई करने दें। विपरीत पक्ष को हलफनामे का जवाब दाखिल करने की अब आवश्यकता नहीं है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हम सेवाओं के नियंत्रण के संबंध में संवैधानिक मुद्दे से निपटेंगे। हम राजनीतिक टकराव के वास्तविक क्षेत्र से पीछे हटेंगे।’’ पीठ ने आगे कहा कि इस तरह के राजनीतिक संघर्ष लोकतंत्र का हिस्सा हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आप हलफनामा दाखिल किये बिना ये बातें कह सकते थे।’’

सिंघवी ने कहा कि दिल्ली सरकार ने किसी भी दस्तावेज की एक भी कॉपी प्रेस को नहीं दी है।

पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ 24 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के दायरे से संबंधित कानूनी मुद्दे पर सुनवाई करने वाली है।

सिसोदिया ने एक हलफनामे में शीर्ष अदालत को बताया है कि

उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने चुनी हुई सरकार के प्रति ‘सिविल सेवकों के अड़ियल रवैये’ को प्रोत्साहित करके दिल्ली में शासन को ‘बेपटरी’ कर दिया है।

हलफनामे में कहा गया है, ‘‘इस साल की शुरुआत में उपराज्यपाल की नियुक्ति के साथ समस्या और भी विकट हो गई है।’’

पांच सदस्यीय संविधान पीठ के अन्य सदस्य न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा हैं।

शीर्ष अदालत ने छह मई को दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण के मुद्दे को संविधान पीठ को सौंप दिया था।

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