देश की खबरें | दिल्ली: 2004 के धोखाधड़ी मामले में फरार इंजीनियर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली में अखबारों में विज्ञापन के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिले का फर्जी वादा कर लोगों को ठगने के आरोप में पुलिस ने 63 वर्षीय एक ‘इंजीनियर’ को गिरफ्तार किया है। यहां एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, दो जुलाई दिल्ली में अखबारों में विज्ञापन के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिले का फर्जी वादा कर लोगों को ठगने के आरोप में पुलिस ने 63 वर्षीय एक ‘इंजीनियर’ को गिरफ्तार किया है। यहां एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार, सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक राजेश राजपूत 2000 के दशक की शुरुआत में कुछ धोखेबाजों के संपर्क में आया और ‘हेल्पलाइन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक फर्जी ‘कंसल्टेंसी’ संस्था संचालित करने में शामिल हो गया।

अधिकारी ने बताया कि यह समूह राष्ट्रीय दैनिक अखबारों में विज्ञापन देकर दावा करता था कि वह लोगों को मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश दिलाने में मदद कर सकता है। समूह इस सेवा के लिए कथित रूप से मोटी रकम वसूलता था।

अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हर्ष इंदौरा ने बताया कि 2004 में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के एक मामले में जमानत मिलने के बाद भी अदालत में पेश नहीं होने पर राजपूत को 2006 में भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया गया था।

उन्होंने बताया कि राजपूत एक ऐसे गिरोह का हिस्सा था जो गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की तर्ज पर संगठन का नेतृत्व करता था और अपने बच्चों के लिए प्रवेश चाहने वाले अभिभावकों को लालच देता था।

डीसीपी ने बताया, ‘‘राजपूत ने अपने साथियों के साथ मिलकर ओडिशा के एक चिकित्सक से उसके बेटे के लिए प्रबंधन कोटे के तहत एमबीबीएस सीट दिलाने के नाम पर चार लाख रुपये की ठगी की थी।’’

धोखाधड़ी के सिलसिले में शालीमार बाग थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंप दी गई।

आखिरकार उसकी तलाश में पुलिस की एक टीम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर पहुंची और एक जुलाई की सुबह छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

डीसीपी ने बताया, ‘‘राजपूत ने शुरू में अपनी पहचान नहीं बतायी, लेकिन बाद में दिल्ली में अपराध शाखा कार्यालय में लगातार पूछताछ के दौरान उसने अपना अपराध कबूल कर लिया।’’

शालीमार बाग थाने और ईओडब्ल्यू के रिकॉर्ड की मदद से उसकी पहचान की पुष्टि की गई। उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(1)(डी) के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।

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