देश की खबरें | यौन उत्पीड़न के मामलों में सुनवाई में देरी अक्सर फिर से शोषण की ओर ले जाती है : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में सुनवाई में देरी अक्सर फिर से शोषण और बदनामी की ओर ले जाती है क्योंकि परीक्षण प्रक्रिया ही पीड़ित के भयानक अनुभव को फिर से जीवित कर देती है और बच्चों के मामले में यह उनकी संवेदनशीलता के कारण और अधिक आघात का कारण बन सकती है।

मुंबई, 22 अप्रैल बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में सुनवाई में देरी अक्सर फिर से शोषण और बदनामी की ओर ले जाती है क्योंकि परीक्षण प्रक्रिया ही पीड़ित के भयानक अनुभव को फिर से जीवित कर देती है और बच्चों के मामले में यह उनकी संवेदनशीलता के कारण और अधिक आघात का कारण बन सकती है।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की एकल पीठ ने शुक्रवार को उपलब्ध कराए गए एक अप्रैल के आदेश में कहा कि पीड़िता के बयान दर्ज करने में देरी से वे यादें ताजा हो जाएंगी जिन्हें पीड़ित भूलना चाहेंगे और सदमा गहरा होगा।

आदेश में कहा गया है कई मामलों में, बच्चे/पीड़ित की वर्षों तक जांच नहीं की जाती है और इसलिए, यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत मामलों के संबंध में परीक्षण करने वाली विशेष अदालतों को निर्देश जारी करना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति डेरे ने कहा कि सभी विशेष अदालतें पीड़ित के साक्ष्य को यथाशीघ्र और जल्द से जल्द दर्ज करेंगी और पीड़ित के साक्ष्यों को दर्ज करने का काम उसी दिन पूरा करने का प्रयास करेंगी।

उच्च न्यायालय ने कहा, “अदालतों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पीड़िता/बच्चे को बार-बार अदालत में नहीं बुलाया जाए, क्योंकि इससे उनको लगा सदमा और बढ़ जाएगा। जब पीड़ित की जांच की जा रही है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए सभी बाल अनुकूल प्रथाओं को अपनाया जाना चाहिए कि वह सुरक्षित महसूस करे, सहज रहे तथा किसी भी तरह से आरोपी के संपर्क में नहीं हो।”

यह आदेश न्यायमूर्ति डेरे ने पोक्सो अधिनियम के एक मामले में गिरफ्तार एक आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इस आधार पर पारित किया था कि वह एचआईवी संक्रमित है। अदालत ने जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसकी चिकित्सा स्थिति स्थिर है और उसे जेल में आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा रही है।

न्यायमूर्ति डेरे ने आदेश में कहा कि मामले में सुनवाई में तेजी लाने के बावजूद, विशेष अदालत ने फरवरी 2022 तक पीड़िता 11 वर्षीय लड़की के साक्ष्य की जांच नहीं की थी। प्राथमिकी पीड़िता की मां ने फरवरी 2019 में दर्ज की थी।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पोक्सो अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में मामलों के कारण मामले का संज्ञान लेने से एक साल के भीतर मुकदमा पूरा करना संभव नहीं हो सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में जहां पीड़िता की उम्र कम है, यह अनिवार्य है कि न्यायाधीश कम से कम पीड़ित के साक्ष्य को यथासंभव शीघ्रता से दर्ज करें, ऐसा न हो कि नाबालिग समय बीतने के कारण घटना को भूल जाए।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

West Indies Women vs Australia Women T20I Stats: टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक-दूसरे के खिलाफ कुछ ऐसा रहा है वेस्टइंडीज महिला बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला का प्रदर्शन, यहां देखें दोनों टीमों के आंकड़े

West Indies Women vs Australia Women, 3rd T20I Match Pitch Report And Weather Update: किंग्सटाउन में वेस्टइंडीज महिला बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला मुकाबले में मौसम बनेगा अहम फैक्टर या फैंस उठाएंगे पूरे मैच का लुफ्त? यहां जानें मौसम का हाल

West Indies Women vs Australia Women, 3rd T20I Match Prediction: तीसरे मुकाबले को जीतकर सीरीज में क्लीन स्वीप करना चाहेगी ऑस्ट्रेलिया महिला, घरेलू सरजमीं पर पलटवार करने उतरेगी वेस्टइंडीज महिला, मैच से पहले जानें कौनसी टीम मार सकती है बाजी

West Indies Women vs Australia Women, 3rd T20I Match T20I Match Preview: कल वेस्टइंडीज महिला बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला के बीच खेला जाएगा अहम मुकाबला, मैच से पहले जानिए हेड टू हेड रिकॉर्ड्स, पिच रिपोर्ट समेत सभी डिटेल्स

\