श्रीनगर, 27 जून माकपा के वरिष्ठ नेता एम वाई तारिगामी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन से गैर-स्थानीय लोगों को खनन के ठेके देने के फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे केन्द्र शासित प्रदेश में हजारों लोगों की आजीविका दांव पर लग गई है।
कश्मीर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) ने भी स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिये खनन नीति की तत्काल समीक्षा करने की मांग की।
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तारिगामी ने एक बयान में कहा, ''इस फैसले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खनिजों के खनन से जुड़े ठेकेदारों, रेत खनन करने वालों, श्रमिकों और परिवहन से जुड़े लोगों पर अपनी आजीविका खोने का खतरा मंडरा रहा है। इनमें से कुछ, विशेषकर रेत खनिक, दशकों से इन गतिविधियों से जुड़े हैं।''
उन्होंने कहा कि पिछले साल तक खनिजों के खनन का अधिकार विशेष रूप से स्थानीय ठेकेदारों के पास सुरक्षित था।
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तारिगामी ने कहा, ''पिछले वर्षों की तरह केवल जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों को ही खनन गतिविधियों की अनुमति होनी चाहिये क्योंकि ऐसा करने से इन गतिविधियों से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका की रक्षा होगी।''
कश्मीर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) ने भी स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिये खनन नीति की तत्काल समीक्षा करने की मांग की।
केसीसीआई के प्रवक्ता ने खनन के ठेके देने के संबंध में भूविज्ञान और खनन विभाग द्वारा अपनाई गई नीति को खतरनाक और जनहित के खिलाफ बताया।
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