देश की खबरें | माकपा ने अपने घोषणापत्र में भाजपा को हराने का आह्वान किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोकसभा चुनाव के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के घोषणापत्र में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और वामपंथ को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। यह आह्वान पार्टी के 2019 के घोषणापत्र में भी किया गया था।

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल लोकसभा चुनाव के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के घोषणापत्र में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और वामपंथ को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। यह आह्वान पार्टी के 2019 के घोषणापत्र में भी किया गया था।

माकपा के पिछले और इस बार के भी घोषणापत्र में लोकतंत्र के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर हमले का आरोप लगाया गया। माकपा के बृहस्पतिवार को जारी घोषणापत्र में यह दावा किया गया है कि भारत ‘‘अस्तित्व के संकट’’ का सामना कर रहा है।

माकपा कई मुद्दों पर अपने पुराने रुख पर कायम है लेकिन घोषणापत्र में पहली बार नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) जैसे कानूनों को खत्म करने का वादा किया गया है।

वाम दल ने 2019 में अपने घोषणापत्र में सत्तारूढ़ दल पर ‘‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करने’’ और सभी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने का आरोप लगाते हुए भाजपा को हराने का आह्वान किया था। इस बार पार्टी के घोषणापत्र में ‘‘प्रत्येक देशभक्त’’ से भाजपा और उसके सहयोगियों की हार सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है।

धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना माकपा के घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल है और 2019 में भी पार्टी ने इसे रेखांकित किया था। पिछली बार, माकपा संसद के कामकाज को कथित तौर पर बाधित करने, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की साख को घटाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर हमलों जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए ‘‘लोकतंत्र पर हमलों’’ को चिह्नित किया था।

पार्टी ने इस बार घोषणापत्र में यूएपीए, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) और पीएमएलए के साथ सीएए जैसे कानूनों को खत्म करने का आह्वान किया है।

माकपा का चुनावी वादा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने की पृष्ठभूमि में आया है।

माकपा ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी का वादा किया है। किसानों के लिए एमएसपी को पार्टी के 2019 के घोषणापत्र में भी जगह दी गई थी।

बेरोजगारी को नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘‘सबसे बड़ी विफलता’’ बताते हुए माकपा ने ‘काम के अधिकार’ को मौलिक अधिकारों में शामिल करने, शहरी क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी के लिए एक कानून लाने के साथ-साथ बेरोजगारी भत्ता देने, सरकारी विभागों में सभी रिक्त पदों को भरने, मनरेगा बजट को दोगुना करने और 100 दिन की सीमा को खत्म करने का भी वादा किया है। ये मुद्दे 2019 में पार्टी के घोषणापत्र में भी थे।

वर्ष 2019 में, पार्टी ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का आह्वान किया था। महिला आरक्षण के लिए एक विधेयक पहले ही पारित हो चुका है, ऐसे में पार्टी ने मांग की है कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

माकपा ने सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण के फैसले को भी उलटने का आह्वान किया है। पार्टी ने अमीरों पर कर लगाने का भी आह्वान किया है। दोनों बिंदु 2019 के घोषणापत्र में भी मौजूद थे।

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