देश की खबरें | कोविड-19 : रोजी-रोटी चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं करतब दिखाने वाले लोग

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मुंबई, एक अगस्त कई लोगों के लिए रोजी-रोटी कमाना मुश्किल ही नहीं बल्कि बेहद कठिन हो जाता है, खासकर महामारी के दौर में जब लोगों को दो वक्त की रोटी कमाने के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण समय का सामना करना पड़ रहा है और कई गैर परंपरागत काम भी करने पड़ रहे हैं। ऐसे में इन लोगों का भविष्य अनिश्चित माना जा रहा है।

पॉवरबॉकिंग, एक्सट्रीम बाइकिंग स्टंट, हिप-हॉपिंग, फ़्रीस्टाइल फ़ुटबॉल या केवल एक 'जीवित प्रतिमा' के रूप में खड़े रहने की कला जैसी कई विविध चीजें हैं, जिनके जरिए लोग जीविकोपार्जन करते हैं और खुद को असामान्य बनाने के अपने जुनून को भी पूरा करते हैं। जीविका कमाने के लिए इस तरह की चीजें करने वाले लोगों को कई महीनों के लॉकडाउन के खत्म होने के बावजूद आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

रोहन सिंह एक पावरबॉकर (कंगारू की तरह उछलने की एक कला) का काम करते हैं। इस बारे में कम लोगों को जानकारी होगी ।

पावरबॉकिंग विशेष स्टिल्ट्स पर दौड़ने, कूदने और कलाबाजी करने की कला है। पिछले वर्ष मार्च में महामारी से पहले सब कुछ ठीक चल रहा था और 27 साल के रोहन पावरबॉकिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए दुनिया के विभिन्न देशों की यात्रा करते थे।

रोहन के भाई राहुल ने 2012 में अल्टीमेट स्ट्राइडर्ज़ नामक एक कंपनी की स्थापना की थी। रोहन के मुताबिक यह भारत का पहला पावरबॉकिंग समूह था।

रोहन ने ‘पीटीआई-’ से कहा, “ महामारी के कारण मनोरंजन जगत और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करने वाले उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई चीजें दोबारा खोल दी गयी हैं, लेकिन हमारा काम अब तक शुरू नहीं हुआ है।”

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