देश की खबरें | अदालत का सोमैया से सवाल: क्या बस अनियमितता के नाम पर जनहित याचिका पर विचार हो

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता किरीट सोमैया से पूछा कि क्या वह शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की पत्नी के स्वामित्व वाली संपत्ति के संबंध में उनकी जनहित याचिका पर महज इसलिए विचार करे, क्योंकि वह (याचिका) कथित अनियमितताओं को उजागर करने का दावा करती है।

मुंबई, 13 दिसंबर बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता किरीट सोमैया से पूछा कि क्या वह शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की पत्नी के स्वामित्व वाली संपत्ति के संबंध में उनकी जनहित याचिका पर महज इसलिए विचार करे, क्योंकि वह (याचिका) कथित अनियमितताओं को उजागर करने का दावा करती है।

सोमैया ने जनहित याचिका में महाराष्ट्र के अलीबाग में ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे के स्वामित्व वाली संपत्ति की अदालत की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध किया है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि जांच में हुए खुलासे की रिपोर्ट भी समय-समय पर अदालत को सौंपी जाए।

याचिका में आरोप लगाया गया कि संपत्ति का निर्माण तटीय विनियमन क्षेत्र नियमों का उल्लंघन करके किया गया है।

याचिका जब मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आई तो अदालत ने पूछा कि वह ऐसे कैसे राहत दे सकती है।

पीठ ने कहा,‘‘खुलासा किस उद्देश्य से? अगर किसी ने कानून में गलती की है तो कुछ कार्रवाई हो सकती है, परिणाम हो सकते हैं। यदि कोई अवैध चीज पाई जाती है तो उसे दंडित किया जा सकता है या मुकदमा चलाया जा सकता है। केवल अनियमितता उजागर करने के लिए याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता।’’

मुख्य न्यायाधीश उपाध्यय ने सवाल किया, ‘‘बिना किसी कारण के शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए एक याचिका पर क्या हम विचार कर सकते हैं?’’

सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव कुमार ने कहा कि अवैध बातों और अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति का निर्धारण करने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

याचिका में दावा किया गया कि जब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाडी (एमवीए) की सरकार थी तब सोमैया ने राज्य और स्थानीय अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।

हालांकि, अदालत ने कहा कि उनके पास वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\