देश की खबरें | न्यायालय ने यूजीसी के दिशानिर्देशों को सही ठहराया, कहा: अंतिम साल की परीक्षा के बगैर प्रोन्नति नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि विश्वविद्यालयों और कालेजों को अंतिम साल की परीक्षायें 30 सितंबर तक कराने का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्देश उसके अधिकार क्षेत्र में है और इन परीक्षाओं में प्रदर्शन छात्रों की क्षमता को प्रतिबिंबित करता है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि विश्वविद्यालयों और कालेजों को अंतिम साल की परीक्षायें 30 सितंबर तक कराने का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्देश उसके अधिकार क्षेत्र में है और इन परीक्षाओं में प्रदर्शन छात्रों की क्षमता को प्रतिबिंबित करता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य और विश्वविद्यालय 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष/अंतिम सेमेस्टर की परीक्षायें आयोजित किये बगैर छात्रों को प्रोन्नत नहीं कर सकते।

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न्यायालय ने कहा कि अंतिम परीक्षा या सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने संबंधी यूजीसी के परिवर्तित निर्देशों और पहले के वर्षों के लिये परीक्षायें नही लेने के विकल्प का तर्कसंगत आधार है और इसे छात्रों के बीच भेदभाव वाला नहीं कहा जा सकता।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें और राज्य आपदा प्रबंधन अधिकरण को आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करके अंतिम वर्ष की परीक्षा के बगैर ही छात्रों को उनके पहले के वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर प्रोन्नत करने का निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

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पीठ ने कहा कि अंतिम वर्ष की परीक्षा छात्रों के लिये अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने का अवसर है जो उनके भावी शैक्षणिक और रोजगार के क्षेत्र में उपयोगी होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षायें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सीखने की प्रक्रिया ऐसा संवाद है जो छात्रों के ज्ञान के बारे में जानकारी प्राप्त करने और उसके आकलन का प्रमाण है।’’

पीठ ने कहा कि यदि किसी राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश ने आपदा प्रबंधन कानून के तहत अधिकारों का इस्तेमाल करके 30 सितंबर तक अंतिम साल की परीक्षाये कराना संभव नही होने जैसा निर्णय लिया है तो हम उन्हें परीक्षा की तारीख 30 सितंबर से आगे बढ़ाने के लिये यूजीसी के समक्ष आवेदन करने की छूट प्रदान करते हैं जिन पर आयोग विचार करेगा और जल्द से जल्द परिवर्तित तारीख के बारे में ऐसे राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश को सूचित करेगा।

पीठ ने अपने 160 पन्नों के फैसले में यूजीसी की तीन जुलाई, 2020 के दिशा निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की है।

पीठ ने कहा कि उसे यूजीसी के छह जुलाई, 2020 के परिवर्तित दिशा निर्देशों में कुछ भी अनुचित या मनमाना नजर नहीं आया है और ये दिशानिर्देश उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं हैं।

पीठ ने कहा कि छह जुलाई के दिशा निर्देश 29 अप्रैल के निर्देशों का ही हिस्सा हैं और वे पहले जारी किये गये निर्देशों के खिलाफ नहीं हैं।

पीठ ने इसके साथ ही शिव सेना की युवा शाखा युवा सेना सहित छात्रों और निजी संगठनों की याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

अनूप

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