देश की खबरें | कोविड-19 महामारी के कारण घोषित ऋण स्थगन के मामले पर न्यायालय बुधवार को करेगा सुनवाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण घोषित छह महीने के ऋण स्थगन से संबंधित मुद्दों पर वह कल सुनवाई करेगा।
नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण घोषित छह महीने के ऋण स्थगन से संबंधित मुद्दों पर वह कल सुनवाई करेगा।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिये आया तो उसने कहा कि इस पर बुधवार को विचार किया जायेगा।
शीर्ष अदालत 27 मार्च को रिजर्व बैंक द्वारा जारी अधिसूचना के ऋण स्थगन की अवधि के दौरान कर्ज की राशि पर ब्याज वसूलने के हिस्से को अवैध घोषित करने सहित कई मुद्दों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
न्यायालय ने पांच अक्टूबर को केन्द्र और रिजर्व बैंक से कहा कि वे कोविड-19 की वजह से विभिन्न क्षेत्रों पर पड़े दबाव के मद्देनजर कर्ज पुनर्गठन के बारे में के वी कामत समिति की सिफारिशों और कर्ज की किस्त स्थगन के मुद्दे पर उनके द्वारा जारी अधिसूचनाएं और परिपत्र उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था।
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इसके बाद, रिजर्व बैंक ने 10 अक्टूबर को न्यायालय में दायर हलफनामे में कहा था कि छह महीने की अवधि से आगे किस्त स्थगन को बढ़ाने से ‘‘समग्र ऋण अनुशासन के खत्म होने’’ की स्थिति बन सकती है और इस वजह से अर्थव्यवस्था में ऋण निर्माण की प्रक्रिया पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
केन्द्र ने भी अलग से हलफनामा दाखिल किया था। इस हलफनामे में केन्द्र कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर अब तक घोषित किए जा चुके राजकोषीय राहत उपायों से आगे बढ़कर किसी भी घोषणा से अर्थव्यवस्था को ‘‘नुकसान’’ पहुंच सकता है और हो सकता है कि बैंक इन ‘‘अपरिहार्य वित्तीय बाधाओं’’ का सामना न कर सकें।
रिजर्व बैंक ने 27 मार्च को जारी परिपत्र में कर्जदारों को एक मार्च से 31 मई, 2020 के दौरान ऋण की अदायगी के स्थगन की अनुमति को दी थी। लेकिन बाद में इस अवधि को इस साल 31 अगस्त तक के लिये बढ़ा दिया गया था।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही ऋण की किस्त स्थगन सुविधा लेने वाले दो करोड़ रुपये तक के कर्जदारों के चक्रवृद्धि ब्याज को माफ करने का फैसला कर चुकी है।
अनूप
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