देश की खबरें | अदालत सुनिश्चित करे कि सरकारी ताकत का अत्यधिक इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में निजी स्वतंत्रता का हनन नहीं हो : उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, दो फरवरी अदालत का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि ‘‘सरकारी शक्तियों का अत्यधिक इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में निजी स्वतंत्रता का हनन नहीं हो।’’ यह बात दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर-पूर्व दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के समय एक बुजुर्ग की हत्या के दो आरोपियों को जमानत देते हुए कही।

उच्च न्यायालय ने आरोपी अरूण कुमार और रवि कुमार को जमानत दे दी लेकिन इसने तीसरे आरोपी विशाल सिंह को यह कहते हुए राहत देने से इंकार कर दिया कि वह महज दर्शक नहीं था।

आरोपी 85 वर्षीय अकबरी बेगम की हत्या के मामले में अभियोजन का सामना कर रहे हैं। यह मामला उत्तर-पूर्व दिल्ली के भजनपुरा थाने में दर्ज है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, ‘‘यह अदालत का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि सरकारी ताकत का अत्यधिक इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में निजी स्वतंत्रता का हनन नहीं हो। जमानत नियम है और जेल अपवाद और अदालतों को निजी स्वतंत्रता के सिद्धांतों को बरकरार रखने के लिए अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए।’’

अदालत ने मंगलवार को तीन अलग-अलग आदेश पारित किए जो बुधवार को उपलब्ध हुए।

उच्च न्यायालय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने बार-बार कहा है कि अदालत को दोनों पक्ष देखना चाहिए यानी आपराधिक कानून को उचित तरीके से लागू किया गया हो और साथ ही कानून लक्षित उत्पीड़न का हथियार नहीं बन जाए।

अभियोजन के मुताबिक भजनपुरा की निवासी महिला अपने घर के अंदर थी जब भीड़ ने कथित तौर पर उसके घर को आग लगा दी जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

आरोपी अरूण कुमार के बारे में अदालत ने कहा कि उसे लाठी के साथ देखा गया लेकिन उसे लाठी से किसी पर हमला करते नहीं देखा गया।

रवि कुमार के बारे में अदालत ने कहा कि वीडियो फुटेज से दिखता है कि उसने चेहरा ढंक रखा था और वह भीड़ के साथ सक्रिय नहीं दिख रहा है और महज दर्शक प्रतीत होता है।

आरोपी विशाल सिंह को जमानत देने से इंकार करते हुए अदालत ने कहा कि उसका मानना है कि अपराध स्थल पर उसका फुटेज काफी उग्र दिख रहा है और यह उसे हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त है।

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