नयी दिल्ली, 31 अगस्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय से अडाणी समूह के खिलाफ नये आरोपों पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया। आप ने अडाणी समूह के खिलाफ ‘सख्त से सख्त कार्रवाई’ की भी मांग की।
अरविंद केजरीवाल नीत पार्टी ने कहा कि अडाणी समूह के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया जाना चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि पूंजी बाजार नियामक सेबी या कोई अन्य सरकारी एजेंसी इस मामले की सच्चाई को सामने नहीं ला पाएगी क्योंकि गौतम अडाणी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबसे करीबी मित्र’ हैं।
संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) द्वारा बृहस्पतिवार को अडाणी समूह पर निशाना साधे जाने के बाद आप ने यह मांग की है।
ओसीसीआरपी ने आरोप लगाया है कि अरबपति गौतम अडाणी के प्रवर्तक परिवार के भागीदारों द्वारा प्रबंधित मॉरीशस स्थित ‘अस्पष्ट’ निवेश कोषों के माध्यम से सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाले समूह के शेयरों में करोड़ों डॉलर का निवेश किया गया था।
हालांकि, अडाणी समूह ने एक बयान में स्पष्ट रूप से इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि इसमें पुराने आरोपों को ही अलग तरीके से दोबारा पेश किया गया है।
समूह ने इसे ‘‘ हिंडनबर्ग रिपोर्ट को पुनर्जीवित करने के लिए विदेशी मीडिया के एक वर्ग द्वारा समर्थित सोरोस-वित्तपोषित हितों का एक प्रयास’’ घोषित किया।
आप नेता संजय सिंह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं शीर्ष अदालत से ओसीसीआरपी रिपोर्ट का संज्ञान लेने और अडाणी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।’’
राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘सेबी अडानी समूह के खिलाफ आरोपों की जांच नहीं कर सकती, क्योंकि यह मामला (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी के सबसे करीबी दोस्त गौतम अडाणी से जुड़ा है।''
आप सांसद ने आरोप लगाया कि अमेरिका स्थित हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडाणी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) दोनों उच्चतम न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं।
आप की राष्ट्रीय प्रवक्ता रीना गुप्ता ने मामले की गहन जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि न तो सेबी और न ही कोई अन्य एजेंसी’’ अडाणी समूह के खिलाफ आरोपों की जांच कर सकेगी।
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