देश की खबरें | अदालत ने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए फीस प्रतिपूर्ति योजना के खिलाफ दाखिल अर्जी पर जवाब मांगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए ट्यूशन फीस प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) योजना को चुनौती देने वाली अर्जी पर दिल्ली सरकार और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग से जवाब मांगा है।
नयी दिल्ली, छह सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए ट्यूशन फीस प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) योजना को चुनौती देने वाली अर्जी पर दिल्ली सरकार और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चन्द्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने अविनाश मल्होत्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त नोटिस जारी किया। याचिका में दावा किया गया है कि धर्म और जाति के आधार पर गैर-अल्पसंख्यक और कम आयवर्ग के छात्रों को योजना से बाहर रखना असंवैधानिक है।
याचिका दायर करने वाले ने कहा कि अगर फीस रीइंबर्समेंट योजना सिर्फ अल्पसंख्यक छात्रों की जगह कम आयवर्ग के सभी छात्रों के लिए लागू की जाती है तो, इस नीतिगत बदलाव की मदद से इस ‘‘संवैधानिक बाधा’’ को दूर किया जा सकता है।
अधिवक्ता अवंतिका मनोहर के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी ने पहली से 12वीं कक्षा तक के अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए ट्यूशन फीस रीइंबर्समेंट योजना को अधिसूचित किया है। योजना के तहत, तीन लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले, दिल्ली के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक छात्रों को ट्यूशन और अन्य अनिवार्य फीस की प्रतिपूर्ति की जाएगी।’’
याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिका दायर करने वाले का पक्ष है कि यह नीति संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है। यह संविधान के अनुच्छेद 15(4) या 15 (6) के अनुरूप है।’’
याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर रीइंबर्समेंट योजना का लाभ कम आय वाले सभी परिवारों को दिया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 46 के अनुरूप होगा, जो कहता है कि राज्य वंचित तबके के लोगों की शिक्षा और आर्थिक हित को बढ़ावा देगा।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह नीति किसी मात्रात्मक आंकड़े पर आधारित नहीं है।
मामले की अगली सुनवाई अब 13 दिसंबर को होनी है।
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