नयी दिल्ली, आठ जून उच्चतम न्यायालय ने 1981 में मिलावटी दूध बेचने के एक मामले में लगभग 39 वर्ष पहले दोषी ठहराये गये 85-वर्षीय एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से बृहस्पतिवार को जवाब तलब किया।
उत्तर प्रदेश निवासी वीरेंद्र सिंह को सात अक्टूबर, 1981 को मिलावटी दूध बेचते पकड़ा गया था और निचली अदालत ने 29 सितंबर 1984 को उसे खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
सिंह ने बुलंदशहर सत्र अदालत में इस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने 14 जुलाई 1987 को निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा था। इसके बाद उसने 28 जुलाई 1987 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने 30 जनवरी 2013 को सुनाये फैसले में सिंह की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन उसकी एक साल की सजा को कम करके छह महीने कर दिया था।
सिंह करीब चार दशक से जमानत पर रिहा था और उसने 20 अप्रैल 2023 को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और दो हजार रुपये जुर्माना भी भर दिया। उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अवकाशकालीन पीठ ने सिंह की ओर से पेश हुए वकील अजेश कुमार चावला से याचिका दायर करने में देरी का कारण बताने को कहा।
चावला ने स्वीकार किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका दायर करने में 10 साल की देरी हुई, लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सिंह ऐसे पते पर रह रहा था, जो अदालत के रिकॉर्ड में उल्लिखित पते से अलग था, इसलिए उसे उच्च न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं थी।
वकील ने कहा, ‘‘उसे (सिंह को) उच्च न्यायालय के आदेश के बारे में उस समय पता चला जब उसे निचली अदालत द्वारा उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के बाद अप्रैल में आत्मसमर्पण करने को कहा गया। इसके बाद कोई समय बर्बाद किए बिना उसने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी।’’
पीठ ने कहा कि वह एक पक्षीय आदेश पारित नहीं कर सकती और वह देरी के मामले एवं याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रही है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘देरी के लिए माफी के आवेदन और याचिका पर नोटिस जारी किया जाए।’’
चावला ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सिंह को छह महीने जेल में बिताने होंगे और अगर मामले की तत्काल सुनवाई नहीं हुई तो यह याचिका निष्प्रभावी हो जाएगी।
पीठ ने वकील से कहा कि याचिका पर राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने दीजिए।
इससे पहले, छह जून को सिंह के वकील सतीश कुमार ने सिंह के बिगड़ते स्वास्थ्य के मद्देजनर उसकी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध किया था।
सिंह ने अपनी याचिका में दावा किया है कि वह दमा समेत विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। सिंह ने कहा कि उसका बुलंदशहर के जेल अस्पताल में इलाज जारी है और उसकी हालत खराब होती जा रही है।
उसने दावा किया है कि वह पेशे से एक बस कंडक्टर था और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दूध खरीदने अपने पैतृक गांव किर्यावली से कल्याणपुर गया था।
सिंह ने कहा कि जब वह कल्याणपुर से अपने घर लौट रहा था, तभी खाद्य निरीक्षक एच सी गुप्ता ने उसे बीच में रोक लिया और वह जो दूध ले जा रहा था, उसके नमूने विश्लेषण के लिए भेजे गए और दूध मिलावटी पाया गया।
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