देश की खबरें | न्यायालय का हैदराबाद सचिवालय से लगे धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण संबंधी याचिका पर विचार से इंकार
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने हैदराबाद में पुराने सचिवालय की इमारत गिराये जाने के दौरान ध्वस्त हुए धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण का केन्द्र और तेलंगाना सरकार को निर्देश देने के लिये दायर याचिका पर विचार करने से सोमवार को इंकार कर दिया।

याचिका में कहा गया था कि तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद में सचिवालय की पुरानी इमारत गिराकर 25 एकड़ क्षेत्र में सचिवालय की नयी इमारत के निर्माण का फैसला किया है। पुरानी इमारत को गिराने की प्रक्रिया के दौरान दो मस्जिदें और एक मंदिर भी गिरा दिया गया है।

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से याचिका की सुनवाई करते हुये कहा कि यह अनुरोध अनुच्छेद 32 के अंतर्गत याचिका में नहीं किया जा सकता।

अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिये सीधे उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है।

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पीठ ने याचिकाकर्ता हैदराबाद निवासी अधिवक्ता खाजा ऐजाजुद्दीन को याचिका वापस लेने और राहत के लिये उच्च न्यायालय में मामला ले जाने की अनुमति दे दी। लेकिन न्यायालय ने धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करने से संबंधित मामले पर तेजी से निर्णय करने का उच्च न्यायालय को निर्देश देने से इंकार कर दिया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (खाजा)याचिका वापस लेने की अनुमति चाहते हैं। यह अनुमति प्रदान की जाती है। तदनुसार याचिका खारिज की जाती है क्योंकि इसे वापस ले लिया गया।’’

याचिका में केन्द्र सरकार और तेलंगाना सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वे कार्यकारी आदेश या राज्य विधान सभा या संसद में प्रस्ताव पारित करके उसी स्थान पर धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण का आश्वासन दें।

याचिका में कहा गया था कि पुराने सचिवालय की इमारत के अंदर स्थित ‘नल्ला पोचम्मा मंदिर’ और ‘मस्जिद दफातिर-ए-मुआतमदी’ और ‘मस्जिद-ए-हाश्मी’ गिरा दी गयी हैं।

अनूप

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