देश की खबरें | अदालत ने अलगाववादी अल्ताफ अहमद शाह को कैंसर उपचार के लिए एम्स स्थानांतरित करने का आदेश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कश्मीरी अलगाववादी अल्ताफ अहमद शाह को कैंसर के उचित इलाज के लिए एम्स में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। वह वर्तमान में जेल में है और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच वाले आतंकी वित्तपोषण के एक मामले में मुकदमे का सामना कर रहा है।

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कश्मीरी अलगाववादी अल्ताफ अहमद शाह को कैंसर के उचित इलाज के लिए एम्स में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। वह वर्तमान में जेल में है और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच वाले आतंकी वित्तपोषण के एक मामले में मुकदमे का सामना कर रहा है।

दिवंगत हुर्रियत नेता एसएएस गिलानी के दामाद शाह ने अदालत को बताया कि वह राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में कुछ गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहा था, लेकिन हाल में पता चला कि वह गुर्दे के कैंसर से पीड़ित है जो अंतिम चरण में है।

यह दावा करते हुए कि आरएमएल में गुर्दे के कैंसर के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं है, उसने अदालत से आग्रह किया कि उसे इलाज के लिए तत्काल एम्स या अपोलो अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत मामले के गुण-दोष में गए बिना कहा कि पर्याप्त और उपयुक्त उपचार का अधिकार संविधान के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा है तथा यह न्याय के हित में है कि याचिकाकर्ता को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज मिले।

उच्च न्यायालय ने तीन अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत मेडिकल रिकॉर्ड दर्शाता है कि याचिकाकर्ता विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। इसने कहा कि उसे गुर्दे का कैंसर होने का भी पता चला है, हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई चिकित्सा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है।

इसने कहा कि मामले के गुण-दोष में जाए बिना पर्याप्त और उपयुक्त उपचार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित मौलिक अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों की समग्रता तथा न्याय के हित में विचार करने के बाद यह आदेश दिया जाता है कि याचिकाकर्ता को संबंधित न्यायिक हिरासत और जेल अधीक्षक की प्रत्यक्ष निगरानी के तहत उचित इलाज के लिए एम्स, दिल्ली में स्थानांतरित किया जाए और सभी आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।

एनआईए ने कहा कि वर्तमान में, यह दर्शाने के लिए कोई मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि याचिकाकर्ता गुर्दे के कैंसर से पीड़ित है और आरएमएल के डॉक्टरों ने उसे किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की सिफारिश नहीं की है।

अदालत ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता को अपने बेटे या बेटी से दिन में एक बार अस्पताल में एक घंटे के लिए मिलने की भी अनुमति दे दी।

इसने कहा कि याचिकाकर्ता को एम्स ले जाने और आगे के इलाज के लिए आवश्यक खर्च याचिकाकर्ता द्वारा वहन किया जाएगा।

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