कोविड-19 के खतरे से बचने के लिए केंद्रीकृत एसी की जगह पंखे लगाले पर विचार कर रही है अदालत
उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति चुनौतियों के समाधान के लिए एक चरणबद्ध योजना पर विचार-विमर्श कर रही है। समिति में चार न्यायाधीश शामिल हैं।
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय केंद्रीकृत एयर कंडीशनर की जगह पंखे लगाने पर विचार कर रहा है क्योंकि ऐसी आशंका है कि अगर कोई कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति एसी क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उसके सांस के जरिये बाहर निकला वायरस वहां फैल सकता है और दूसरों को संक्रमित कर सकता है।
उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति चुनौतियों के समाधान के लिए एक चरणबद्ध योजना पर विचार-विमर्श कर रही है। समिति में चार न्यायाधीश शामिल हैं।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली समिति को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने लॉकडाउन के बाद उच्च न्यायालय के भवनों में केंद्रीकृत एसी संयंत्र के कामकाज के बारे में अवगत कराया और बताया कि इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए ताकि इससे कोरोना वायरस का प्रसार न हो।
28 अप्रैल को आयोजित समिति की बैठक में पीडब्लूडी अधिकारियों द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट रिपोर्ट के अनुसार, भले ही उच्च न्यायालय अल्ट्रा वायलेट कीटाणुनाशक विकिरण उपकरणों की खरीद और उसे स्थापित करने पर बड़े पैमाने पर खर्च कर सकता है, लेकिन इससे भी वायरस से पूर्ण सुरक्षा की कोई गारंटी नही होगी ।
समिति में न्यायमूर्ति विपिन सांघी, राजीव शकधर और तलवंत सिंह शामिल हैं।
समिति को पीडब्लूडी के इंजीनियरों ने अवगत कराया गया कि ऐसा उपकरण केवल एएचयू में प्राप्त हवा को फिर से प्रसारित करने के लिए कीटाणुरहित कर सकता है और यदि कोई कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति केंद्रीकृत एयर कंडीशनिंग वाले क्षेत्र में प्रवेश करता है, इसकी फिर भी आशंका रहेगी कि उस व्यक्ति के सांस से निकले वायरस के कण भीतर की हवा में मौजूद रह सकते हैं और दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।’’
समिति को सुझाव दिया गया कि इस स्थिति में पंखें उपयोगी होंगे ।
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