नयी दिल्ली, 29 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने अभिनेत्री एवं पूर्व सांसद जयाप्रदा को उस मामले में निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करने से छूट प्रदान की है, जिसमें उन्हें उनके स्वामित्व वाले एक सिनेमा थिएटर के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) का 18 वर्ष से अधिक समय तक बकाया भुगतान नहीं करने के लिए छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी।
न्यायमूर्ति एस. वी. एन. भट्टी की एकल पीठ ने चैंबर में सुनवाई के दौरान अभिनेत्री और मामले के अन्य सह-आरोपियों से उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को रद्द करने के लिए निचली अदालत का रुख करने को भी कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘निर्धारित समय के भीतर आत्मसमर्पण करने से छूट के अनुरोध संबंधी आवेदन मंजूर किया जाता है। याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील का कहना है कि निचली अदालत ने विशेष अनुमति याचिका दायर करने से पहले याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किया है और एनबीडब्ल्यू लंबित है।’’
इसने कहा, ‘‘इसलिए वह (अभिनेत्री) याचिकाकर्ताओं को उनके खिलाफ जारी लंबित एनबीडब्ल्यू को रद्द करने के लिए कानून के अनुसार एक आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता चाहती हैं। इस संबंध में याचिकाकर्ताओं के लिए उपलब्ध उपायों को क्षेत्राधिकार अदालत द्वारा विचार के लिए स्वतंत्र रखा जाता है।’’
‘जयाप्रदा सिनेमा’ की एक साझेदार जयाप्रदा को एग्मोर में एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने छह महीने की सजा सुनाई थी।
यह फैसला थिएटर के कर्मचारियों की उस याचिका पर सुनाया गया था, जिसमें शिकायत की गई थी कि अभिनेत्री ने उनके ईएसआई अंशदान का भुगतान नहीं किया है।
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