देश की खबरें | अदालत ने जेएनयू हिंसा मामले में प्राथमिकी की मांग करने वाली प्रोफेसर सेन की याचिका खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में पांच जनवरी को कथित तौर पर नकाबपोश लोगों के हमले में घायल हुई प्रोफेसर सुचित्रा सेन की याचिका दिल्ली की एक अदालत ने खारिज करते हुए कहा है कि एक मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में पांच जनवरी को कथित तौर पर नकाबपोश लोगों के हमले में घायल हुई प्रोफेसर सुचित्रा सेन की याचिका दिल्ली की एक अदालत ने खारिज करते हुए कहा है कि एक मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।

सेन ने याचिका के जरिये इस विषय में एक प्राथमिकी दर्ज करने के लिये निर्देश देने का अनुरोध किया था।

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पुलिस द्वारा स्थिति रिपोर्ट दाखिल किये जाने के बाद अदालत ने यह आदेश जारी किया। पुलिस ने अदालत को बताया कि जेएनयू के पेरियार हॉस्टल में जमा भीड़ की इस हिंसा की घटना को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है

अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि इससे यह पता चलता है कि शिकायतकर्ता सहित कई लोग उस हिंसक गतिविधि के परिणामस्वरूप घायल हुए,जिसका उल्लेख पहले ही दर्ज की जा चुकी प्राथमिकी में किया गया है। साथ ही, घटना के समय, स्थान और संपत्ति को हुए नुकसान एवं शिकायतकर्ता एवं अन्य को आई चोट की जानकारी के बारे में एकरूपता है।

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मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पवन सिंह रजावत ने याचिका खारिज करते हुए बुधवार को जारी अपने आदेश में कहा, ‘‘इसलिए, मैं इस बात से सहमत हूं कि शिकायतकर्ता द्वारा दी गई शिकायत पर अलग प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की कोई जरूरत नहीं है। ’’

हालांकि, न्यायाधीश ने अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को इस सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी की जांच की स्थिति रिपोर्ट 19 दिसंबर तक दाखिल करने का निर्देश दिया है।

प्राथमिकी वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस थाने में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई थी और बाद में इसे अपराध शाखा को हस्तांतरित कर दिया गया।

स्थिति रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विषय की जांच करने वाले जांच अधिकारी (आईओ) ने अखिल भाारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से भी मेडिकल रिपोर्ट हासिल की थी , जिसमें यह कहा गया है कि शिकायतकर्ता को आई चोट सामान्य है।

इसमें कहा गया है कि सेन का बयान 20 फरवरी को दर्ज किया गया था।

अदालत ने कहा कि हालांकि, सेन एक अलग प्राथमिकी चाहती हैं लेकिन उन्होंने इस बारे में कोई आशंका नहीं जाहिर की है कि उनकी शिकायत की जांच पहले से दर्ज प्राथमिकी में नहीं की जाएगी।

शिकायत के मुताबिक सेन, छात्रों और अन्य अध्यापकों के साथ पांच जनवरी को साबरमती टी प्वाइंट पर एक बैठक कर रही थी और शाम छह-साढ़े छह बजे के करीब यह पता चला कि घातक हथियारों से लैस भीड़ पेरियार हॉस्टल में एकत्र हुई है।

शिकायत के मुताबिक भीड़ बैठक स्थल पर पहुंची और पथराव करना तथा छात्रों एवं अध्यापकों को पीटना शुरू कर दिया, जिसमें शिकायतकर्ता को चोटें आईं।

शिकायत में इस विषय में एक अलग प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई।

प्रोफेसर ने अपने बयान में दावा किया है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और अपराध शाखा को हस्तांतरित किया गया मामला एक अलग प्राथमिकी है।

उन्होंने अपनी याचिका में अदालत से कहा था कि प्राथमिकी दर्ज करने की तत्काल जरूरत है क्योंकि मामला दर्ज होने पर ही जांच हो सकती है।

गौरतलब है कि पांच जनवरी को डंडों और सरिया से लैस नकाबपोश लोगों ने छात्रों एवं अध्यापकों पर हमला किया था तथा परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था, जिसके चलते विश्वविद्यालय प्रशासन को परिसर में पुलिस बुलानी पड़ी थी जिसने (पुलिस ने) फ्लैग मार्च किया था।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष सहित कम से कम 28 लोग इस घटना में घायल हो गये थे।

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