देश की खबरें | अदालत ने ईपीएफ अधिनियम के उल्लंघन के दावे वाली जनहित याचिका खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि ईपीएफ में सदस्यों के नामांकन के दौरान कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम-1952 और इसके तहत बनी योजनाओं का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि ईपीएफ में सदस्यों के नामांकन के दौरान कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम-1952 और इसके तहत बनी योजनाओं का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना में बिना अर्हता वाले लोगों का सदस्य के रूप में नामांकन किया जा रहा है जिससे केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को ‘भारी नुकसान’ हो रहा है।

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ईपीएफओ में लेखाकार अधिकारी और याचिकाकर्ता शोवन पात्रा ने कहा कि ऐसे कर्मचारी हैं जो भविष्य निधि में योगदान कर रहे हैं और आयकर लाभ लेते रहे हैं, अपने पीएफ खाते से बीमारी के आधार पर पैसा निकाल रहे हैं क्योंकि ऐसे मामलों में पेशगी राशि के लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं है और जब वे सेवा छोड़ते हैं तो उनके खाते में इतनी कम राशि होती है कि कोई कर देनदारी नहीं बनती।

याचिकाकर्ता शोवन पात्रा ने आरोप लगाया, ‘‘ आयकर प्रावधानों से बचने की वजह से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।’’

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याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कर बचाने और अन्य लाभ लेने के लिए नियोक्ता अपने पुराने रिश्तेदारों को या यहां तक स्वयं को पूरी तनख्वाह पर भविष्य निधि सदस्य नामांकित करा लेते हैं जबकि वे भविष्य निधि सदस्यता के लिए योग्य नहीं हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा, ‘‘ भविष्य निधि में नामांकन कराने के लिए उम्र सीमा नहीं है, इसलिए मृत्यु तक योगदान करते हैं और ईपीएफ योजना के तहत करमुक्त लाभ लेने के साथ कर्मचारी के बीमा से जुड़ी छह लाख रुपये की राशि का लाभ भी ले लेते है।’’

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह केंद्र को वर्ष 1952 के अधिनियम के अनुरूप ईपीएफओ के सॉफ्टवेयर में और इसके अंतर्गत बनी योजनाओं में बदलाव करने का निर्देश दे ताकि केवल योग्य कर्मचारियों का ही सदस्य के तौर पर नामाकंन हो सके।

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