नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार को असम राइफल्स में तैनात सेना के सभी अधिकारियों और कर्मियों को वापस बुलाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सेवा मामलों में जनहित याचिका विचारणीय नहीं है और असम राइफल्स में अपनी तैनाती से असंतुष्ट कोई भी कर्मचारी अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र है।
अदालत ने 17 अक्टूबर के अपने आदेश में यह भी कहा कि इस याचिका में जो राहत मांगी गई है, उन्हें उच्च न्यायालय की खंडपीठ एक अन्य मामले में पहले ही अस्वीकार कर चुकी है।
उच्च न्यायालय ने इन्हीं टिप्पणियों के साथ इस याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता असम राइफल्स से सेवानिवृत्त कमांडेंट हैं और उन्होंने सेना के अधिकारियों की बल में तैनाती पर एतराज़ जताया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सेना के अधिकारी असम राइफल्स में तैनाती को लेकर अवैध रूप से ‘प्रतिनियुक्त भत्ता’ मांगते हैं। याचिका में इसकी जांच की मांग की गई थी।
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