देश की खबरें | अदालत ने सभी अदालत परिसरों में फाइबर इंटरनेट लाइनें बिछाने से संबंधित याचिका पर विचार से इनकार किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें शहर के सभी अदालत परिसरों में तेज गति के इंटरनेट के लिए हर टेलीकॉम कंपनी की फाइबर लाइनें बिछाने का अनुरोध किया गया था ताकि कोविड-19 महामारी के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मुकदमों की प्रभावी तरीके से सुनवाई हो सके।
नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें शहर के सभी अदालत परिसरों में तेज गति के इंटरनेट के लिए हर टेलीकॉम कंपनी की फाइबर लाइनें बिछाने का अनुरोध किया गया था ताकि कोविड-19 महामारी के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मुकदमों की प्रभावी तरीके से सुनवाई हो सके।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि अच्छा मुद्दा उठाया गया है, लेकिन अभी कोई राहत नहीं दी जा सकती है, क्योंकि इसमें काफी खर्च आएगा और सरकार की अपनी प्राथमिकताएं हैं।
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पीठ ने कहा, " यह इसके (जिला अदालतों में फाइबर केबल बिछवाने के लिए) लिए सही समय नहीं है। हम इसे समय पर करेंगे, धीरे-धीरे करेंगे।"
बहरहाल, अदालत ने याचिकाकर्ता वकील को उचित प्राधिकरणों के समक्ष अभिवेदन देने की अनुमति दे दी और निर्देश दिया कि प्राधिकरण अभिवेदन मिलने पर इस मामले के तथ्यों पर लागू कानून, नियम, विनियम और सरकार की नीति के अनुसार फैसला करें और इसकी वित्तीय प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखें।
इसी के साथ पीठ ने याचिका का निपटान कर दिया।
यह याचिका वकील सतनारायण शर्मा ने दायर की थी। उनका दावा है कि बुनियादी ढांचे की कमी और इंटरनेट की खराब कनेक्टिविटी के कारण राष्ट्रीय राजधानी के अधिकतर अदालत परिसरों में न्यायाधीशों और वकीलों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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